बिजनौर, जागरण टीम। भाजपा के टिकट की घोषणा पर चल रही उहापोह की स्थिति पर शनिवार को विराम लग गया। भाजपा हाईकमान ने कमलेश सैनी पर दांव लगाया है। टिकट घोषित होने के बाद लाइन में लगे कई दावेदारों के झटका तो लगा ही है। वहीं कमलेश सैनी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि, अभी चुनाव में एक माह का समय बचा है, लेकिन 2017 में चांदपुर विस में पहली बार महिला विधायक बनीं कमलेश सैनी के ऊपर ताज बचाने की जिम्मेदारी होगी।

वर्ष 2017 में चांदपुर विधान सभा सीट पर पहली बार भाजपा से कमलेश सैनी विधायक बनी थीं। यही नहीं उन्होंने 92,345 वोट पाकर रिकार्ड बनाया था। उन्होंने बसपा के इकबाल ठेकेदार को 35,649 वोटों से हराया था। चांदपुर की राजनीति में वर्ष 1952 से लेकर 2012 तक इस सीट पर पुरुष प्रत्याशी ही विजयी होते रहे है। इस सीट पर महिला प्रत्याशियों ने कई बार यहां से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाईं। वर्ष 1993 में पहली बार जनता दल से चांदपुर सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती ने चुनाव लड़ा, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी तेजपाल सिंह के सामने हार गईं। उसके बाद वर्ष 1996 में तेजपाल सिंह की पत्नी सुरेखा चौधरी बसपा से चुनाव मैदान में उतरीं, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी स्वामी ओमवेश से हार गईं। वर्ष 2012 में भाजपा से कविता चौधरी ने चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के इकबाल ठेकेदार से हार गईं। 2017 में भाजपा की लहर के बीच कमलेश सैनी ने बड़ी जीत हासिल कर इस सीट पर ना केवल कमल खिलाया, बल्कि पहली महिला विधायक का ताज भी पहना। अब 2022 के विस चुनाव में एक बार फिर भाजपा हाईकमान ने कमलेश सैनी पर दांव खेला है। देखना दिलचस्प होगा कि वह दूसरी बार भाजपा की साख के साथ-साथ विधायक का ताज बचाने में कामयाब होंगी या नहीं। हालांकि, अभी सपा-रालोद के गठबंधन के प्रत्याशी पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। जिसकी घोषणा को लेकर जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है।

Edited By: Jagran