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बिजनौर में फिर बढ़ रहा गिद्धों का कुनबा, अमानगढ़ और मोहनपुर को बनाया नया ठिकाना

Published: Sat, 05 Sep 2026 09:00 AM (GMT+05:30)

बिजनौर जिले में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और अन्य वन क्षेत्रों में गिद्धों का कुनबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के बाहर गांव देवानंदपुर गढ़ी के पास पेड़ पर बैठा गिद्धों का झुंड। सौजन्य

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के बाहर गांव देवानंदपुर गढ़ी के पास पेड़ पर बैठा गिद्धों का झुंड। सौजन्य

HighLights

  1. बिजनौर में अमानगढ़ के आसपास गिद्धों की संख्या बढ़ रही है।

  2. मोहनपुर आरक्षित वन क्षेत्र में भी गिद्धों का झुंड देखा गया।

  3. जिले में सिनेरियस, ग्रिफान सहित गिद्धों की तीन प्रजातियाँ मौजूद।

अजीत चाैधरी, बिजनौर। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और अन्य वन क्षेत्रों में सिमटे गिद्धों का कुनबा जिले में अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अमानगढ़ के आसपास के गांवों के खेतों में भी अब गिद्ध दिखाई देने लगे हैं।

हाल ही मनुष्यों से खाली कराए गए मोहनपुर आरक्षित वन क्षेत्र में भी गिद्धों का झुंड दिख रहा है। पिछले वर्ष यहां पर दशकों बाद एक गिद्ध दिखाई दे रहा था। यहां गुलदार आए तो उसके शिकार के बचे मांस को खाने के लिए गिद्ध भी आ गए हैं। भले ही बस्तियों की ओर अभी गिद्ध न लौटें लेकिन उनका कुनबा जिले में अब फिर से बढ़ने लगा है।

गिद्धों को प्रकृतिक का सफाइकर्मी कहा जाता है। ये बूढ़े या बीमार होकर मरे पशुओं व वन्यीवों द्वारा शिकार करके खाए गए दूसरे जीवों के बचे मांस को खाते हैं। पहले घरों के आसपास भी गिद्ध दिखते थे लेकिन अब संयोग से भी गिद्ध आबादी के आसपास नहीं दिखते हैं।

जिले में लगभग तीन दशक से आबादी के आसपास गिद्ध नहीं दिख रहे हैं। एक बार को मान लिया गया था कि गिद्ध शायद जिले में अब बचे ही नहीं हैं। लगभग आठ वर्ष पहले अमानगढ़ में गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई दिया था। झुंड इतना बड़ा था कि वन विभाग के अधिकारी भी हैरत में पड़ो। इसके बाद वहां गिद्धों का दिखना आम हो गया।

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पिछले वर्ष मोहनपुर आरक्षित वन क्षेत्र में भी गिद्ध दिखाई दिए थे। यहां पर पहले मनुष्य कब्जा करके खेती कर रहे थे। वन विभाग ने इस कब्जे को हटाकर दो वर्ष पहले पौधारोपण कर दिया था। बड़े साइज वाले पौधे लगाए गए। इंसान दूर गए तो यहां पर रहने के लिए कई प्रजाति के वन्यजीव और उनका शिकार करने के लिए गुलदार भी आ गए।

पिछले वर्ष यहां नवंबर के माह में पहली बार गिद्ध दिखाई दिया था। माना गया कि गुलदार जब यहां खुले में आ गया तो उसके शिकार के अवशेष को खाने के लिए गिद्ध आ गया। प्रकृति ने अपने संतुलन के नियम का पालन किया। अब वहां भी गिद्धों का झुंड दिख रहा है।

अमानगढ़ के आसपास के गांवों के खेतों में भी गिद्ध दिखाई देने लगे हैं। यहां सात गुलदार और तीन शावक दिख रहे हैं। गिद्धों को गन्ने के खेत में मरे हुए जानवर नहीं दिखते और वनों मे जानवरों के शव देखने में कोई परेशानी नहीं आती।

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गर्दन पर नहीं होते पंख

गिद्धों की अधिकतर प्रजातियों की गर्दन पर पंख नहीं होते हैं। इसका कारण यह है कि वे जीवों के शव के खाल के अंदर गर्दन डालकर मांस खाते हैं। उनके पंख हों तो खून व मांस का तरल उनकी गर्दन पर चिपक जाएगा। गर्दन पर पंख न होने की वजह से ही ये थोड़े अजीब से दिखते हैं।

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मिलती हैं तीन प्रजाति

अमानगढ़ में तीन प्रजाति के गिद्ध मिलते हैं। यहां मिलने वाले सिनेरियस वल्चर यानि गिद्ध को किंग वल्चर भी कहा जाता है। इसकी गर्दन पर पंख होते हैं। जब कहीं गिद्धों का झुंड पशु के शव की दावत उड़ा रहा हो तो और किंग वल्चर वहां आ जाए तो बाकी सभी गिद्ध उसे देखकर हट जाते हैं। पहले किंग वल्चर अपना पेट भरता है और बाद में सारे गिद्ध। साथ ही यहां ग्रिफान गिद्ध भी मिलता है।


जिले में गिद्धों का कुनबा बढ़ रहा है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के बाहर के इलाकों में भी गिद्ध दिख रहे हैं। जिले में कई प्रजाति के गिद्ध मिलते हैं। मोहनपुर आरक्षित वन क्षेत्र में भी गिद्ध दिखाई देने लगे हैं।

                                                                                         जय सिंह कुशवाहा, डीएफओ