माटी कला का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बन रहे मेरठ-मुरादाबाद के युवा
बिजनौर के मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र में मेरठ और मुरादाबाद समेत कई जिलों के 28 युवाओं को माटी कला के आधुनिक उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण मिल रहा है।

मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र, अकबरपुर चौगावां में माटी कला के हुनर सीखते प्रशिक्षणार्थी। जागरण
HighLights
28 उद्यमियों को आधुनिक माटी कला उपकरण प्रशिक्षण।
मेरठ और मुरादाबाद के युवा हुए प्रशिक्षण में शामिल।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, नजीबाबाद (बिजनौर)। मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र, अकबरपुर चौगावां में केवल जनपद बिजनौर ही नहीं, बल्कि मेरठ और मुरादाबाद जनपद के 28 चयनित उद्यमियों को आधुनिक उपकरण संचालन के लिए हुनर सीख रहे हैं। इसका उद्देश्य माटी कला को जिंदा कर इन उत्पादों को बाजार में उतारकर युवाओं को स्वरोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की माटीकला टूल किट्स वितरण योजना के अंतर्गत प्रशिक्षार्थियों को माटीकला के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिये गए हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य उद्यमियों को विद्युत चालित चाक और पगमिल मशीन जैसे आधुनिक उपकरणों के संचालन में दक्ष बनाया जा रहा है। योजना के अंतर्गत चयनित उद्यमियों को ये उपकरण निश्शुल्क उपलब्ध कराये जाएंगे, जिससे माटीकला के कार्य को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।
माटीकला के 28 उद्यमियों को दिया आधुनिक उपकरण संचालन का प्रशिक्षण माटीकला उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए छोटे व्यापारियों से संपर्क करने और कम लाभ पर उत्पाद बेचने की दी सलाह दी है। मेरठ और मुरादाबाद जनपद के 28 चयनित उद्यमियों को आधुनिक उपकरण संचालन सिखाया गया। इस कार्यक्रम में मेरठ के 21 और मुरादाबाद के सात चयनित उद्यमियों ने प्रतिभाग किया। इसका उद्देश्य उद्यमियों को विद्युत चालित चाक और पगमिल मशीन जैसे आधुनिक उपकरणों के संचालन में दक्ष बनाना है।
इन जिले के युवा हुए पारंगत
-प्रथम चरण में जनपद बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, शामली, नोएडा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, अमरोहा और गाजियाबाद के कुल 300 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान दिया जा चुका है। दूसरे चरण में बुलंदशहर और बागपत जनपद के चयनित 76 उद्यमियों को आधुनिक उपकरण संचालन का प्रशिक्षण देकर पारंगत किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से माटीकला से जुड़े कारीगरों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
-एसएल अग्रवाल, प्राचार्य, मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र, अकबरपुर चौगावां