बागपत : देश आजाद कराने को फिरंगी हुकूमत के छक्के छुड़ाने में बागपत के सपूतों का तोड़ नहीं। अग्रवाल मंडी टटीरी के लाला अर्जुन ¨सह ने तो रेलवे स्टेशन को आग लगाकर भूचाल ला दिया और आजादी के आंदोलन की धार पैनी करने में कसर नहीं छोड़ी थी। दरअसल, महात्मा गांधी ने 1942 में 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का आह्वान किया तो देशभक्त अर्जुन ¨सह भी जंग-ए-आजादी में कूद पड़े।

उन्होंने अग्रवाल मंडी टटीरी के रेलवे स्टेशन पर आग लगाकर अंग्रेजों को खुली चुनौती दे डाली। बौखलाए अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर इनाम बोल दिया। जो व्यक्ति उन्हें गिरफ्तार कराएगा उसे इनाम मिलेगा। अंग्रेज पुलिस ने अर्जुन ¨सह को गिरफ्तार कर कोतवाली लाए और बेरहमी से पिटाई की। असहनीय यातनाओं से भी वो नहीं टूटे तो अंग्रेज अफसरों ने प्रस्ताव रखा कि यदि माफी मांग लेंगे कि भविष्य में उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तो माफ कर देंगे।

जांबाजी दिखाते हुए उन्होंने अंग्रेजों से माफी मांगने से इंकार करते हुए कहा कि भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति को प्राण न्योछावर करने पड़ते तो वे पीछे नहीं हटेंगे। लिहाजा माफी मांगने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। गिरफ्तारी के बाद जेल में रखकर भी यातना दी गई। पांच जनवरी 1911 को अग्रवाल मंडी टटीरी वैश्य अग्रवाल परिवार में जन्मे इस महान देश भक्त के बचपन में ही उनके पिता लाला शीलचंद तथा मां का निधन हो गया था। लाला अर्जुन ¨सह में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी थी। इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बड़े पुत्र लाला अभिमन्यु गुप्ता भी निरंतर समाज सेवा तथा देश सेवा में जुटे हैं। वह अब तक 41 हजार गरीबों की आंखों के मोतियाबिंद के आपरेशन कराने तथा 90 व्यक्तियों से नेत्रदान कराने का कीर्तिमान कायम कर चुके हैं।

Posted By: Jagran