नजीबाबाद (बिजनौर): चल कांवड़िया चल कांवड़ उठा, कांवड़ उठाकर नारा शिव का लगा.. तन को शक्ति और मन को सुकून देने वाले भक्ति गीतों को गाते-गुनगुनाते कांवड़ियों के जत्थे गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। क्षेत्र में हो रही बारिश में भी कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बनता था। नजीबाबाद में कुछ देर विश्राम कर गंतव्य की ओर रवाना होने से पहले कांवड़िए उठक-बैठक लगाकर भगवान शिव से भूलचूक माफ करने की कामना करते नजर आए।

श्रावण मास की शिवरात्रि पर्व ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है, कांवड़ियों में उल्लास भी बढ़ता ही जा रहा है। बरेली, बुलंदशहर, नानकमत्ता क्षेत्र के श्रावणी कांवड़िए डाक कांवड़ों के साथ नजीबाबाद पहुंचे। कांवड़ियों के जत्थे के साथ चल रहे वाहन पर लगे डीजे पर भक्तिरस की धारा बह रही थी। भगवान शिव की जय-जयकार करते चल रहे कांवड़िए भक्ति गीतों पर झूम रहे थे। कांवड़ियों रामप्रसाद, उमंग, सीताराम, संतोष का कहना था कि वे 15 दिन की श्रावण कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। इन दिनों में कठिन साधना के बाद शिवालयों में जलाभिषेक कर वे भोले से आशीर्वाद लेंगे।

रविवार को नजीबाबाद में विश्राम करने के बाद नानकमत्ता क्षेत्र के कांवड़ियों का जत्था आगे बढ़ा, तो कांवड़ को उठाने से पहले कई कांवड़िए दोनों कानों को पकड़कर उठक-बैठक कर क्षमा याचना करते नजर आए। कांवड़ियों का कहना था कि कांवड़ में गंगाजल लेकर पदयात्रा करते समय उनसे जाने-अंजाने में कई भूलचूक हो जाती हैं। यात्रा पर आगे बढ़ने से पहले वे भगवान शिव से भूलवश हुए अपराधों की क्षमा मांगते हैं और प्रार्थना करते हैं कि शेष यात्रा में उनसे कोई चूक न हो।

Posted By: Jagran

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