बिजनौर : जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद साकेंद्र चौधरी ने सबसे पहले छोइया नदी को प्रदूषण मुक्त कराने का बीड़ा उठाया। अफसरों का अमला लेकर मोहित पेट्रो केमिकल पर पहुंचकर छोइया नदी से पानी के नमूने लिए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जलनिगम, पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग की टीम के अफसरों ने जिला पंचायत अध्यक्ष की मौजूदगी में अपने-अपने स्तर से जांच की। जांच में छोइया नदी में प्रदूषित पानी गिराने का मामला सामने आया था। जिला पंचायत अध्यक्ष ने पत्रकारवार्ता में मोहित पेट्रो केमिकल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का वादा किया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही जिला पंचायत अध्यक्ष के बोल फैक्ट्री मालिक के प्रति बदल गए। बताते हैं कि बड़ी पंचायत के एक माननीय की मध्यस्थता के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष ने मुंह मोड़ लिया। इसको लेकर काफी समय तक चर्चाएं होती रहीं। इससे पहले भी एक आरटीआइ कार्यकर्ता सहित कई लोगों ने छोइया नदी के पानी को लेकर आंदोलन चलाया था, लेकिन बाद में आंदोलन ढीला पड़ गया।

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