धामपुर: केंद्र व प्रदेश सरकार बाल श्रम उन्मूलन के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, बावजूद इसके बच्चे कूड़ों के ढेर से पन्नी व होटलों में बर्तन साफ करते आसानी से देखे जा सकते हैं।

तहसील क्षेत्र में होटलों, गेस्ट हाउस एवं चाय की दुकानों पर सैकड़ों बाल श्रमिक लोगों के जूठे बर्तन धोने को मजबूर हैं, वहीं कई स्थानों पर अप्रवासी/ घुमंतू जाति के दर्जनों बच्चे प्रतिदिन कूड़े के ढेर, नालियों व नालों से पन्नी बीन कर अपना गुजरा करने में लगे हैं। गरीबी से बेहाल इन लोगों को होटल संचालकों की मनमानी व प्रताड़ना का भी शिकार होना पड़ता है। जबकि केंद्र व प्रदेश सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा रही है। एसडीएम वीरेंद्र कुमार मौर्य ने होटलों व अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे बाल श्रमिकों का सर्वे करान की बात कही है। उन्होंने होटलों पर बाल श्रमिक के कार्य करते पाए जाने पर होटल मालिकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कही।

Posted By: Jagran