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कन्या सुमंगला योजना: बिजनौर उत्तर प्रदेश में नंबर वन, 48 हजार से अधिक बेटियों को मिल रहा है लाभ

Published: Mon, 24 Aug 2026 08:24 PM (IST)

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के क्रियान्वयन में बिजनौर जिला जुलाई माह में उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। बेटियों के लालन-पालन और शिक्षा में जिले के माता पिता सबसे अच्छा काम कर रहे हैं। योजना जुलाई माह में जिला सूबे में पहले नंबर पर रहा है। 48 हजार से अधिक परिवार अपनी बेटियों को योजना से जोड़ चुके हैं। अधिक से अधिक परिवारों को योजना से जोड़ने के लिए काम किया जा रहा है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को साकार करने में जिले के लोग भी सक्रिय योगदान रहे हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा भी जिले के गांव स्वाहेड़ी से ही निकला है। आर्य समाज से जुड़े ग्रामीण दो दशक से अधिक समय से इस नारे के साथ ही हवन करते हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों के लालन पालन और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना संचालित की जा रही है। योजा में अलग अलग चरणों में सरकार द्वारा आर्थिक सहयोग किया जाता है।

योजना के अंतर्गत जिले में 48 हजार 968 बेटियों को पंजीकृत किया जा चुका है। योजना के क्रियान्वयन में जुलाई माह में जिला सूबे में पहले नंबर पर रहा है। योजना में बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक मदद छह चरणों में दी जाती है।

बेटी का जन्म होने पर पांच हजार, एक साल में सभी टीके लगने पर दो हजार, पहली कक्षा में प्रवेश पर तीन हजार, छठी कक्षा में प्रवेश पर तीन हजार, नौंवी कक्षा में प्रवेश लेने पर पांच हजार और स्नातक या डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पर सात हजार रुपये दिए जाते हैं। परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक होनी चाहिए तथा माता पिता की दो बेटियों को ही योजना में पात्र माना जाता है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में अच्छा काम किया जा रहा है। माता पिता भी बेटियों को पढ़ाने में आगे बढ़ रहे हैं। जुलाई में योजना में बिजनौर जिला प्रदेश में पहले नंबर पर रहा है।

-विमल कुमार चौबे, जिला प्रोबेशन अधिकारी

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