'चिकन पार्टी' के बाद अब उल्लू के बच्चे करेंगे चूहों का 'शिकार', बिजनौर के वन विभाग ने देहरादून से ऑर्डर देकर मंगाया
Bijnor News: बिजनौर निवासी जगदीश कुमार के घर से उल्लू के छह बच्चे मिले थे। उन्होंने उल्लू वन विभाग की ...और पढ़ें

बिजनौर में पिंजरे में बंद उल्लू के बच्चे। सौ. वन विभाग
HighLights
वन विभाग ने उल्लू के बच्चों के लिए देहरादून से 52 चूहे मंगवाए।
चूहे उल्लुओं की आहार श्रंखला में शामिल पसंदीदा शिकार।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। उल्लू के बच्चों का पेट भरने के लिए वन विभाग ने देहरादून की एक फर्म से 52 चूहे मंगवाएं हैं। ये चूहे जिंदा ही उनके पिंजरे में छोड़े जाएंगे। शिकार करना और खाना सीखने के बाद इन बच्चों को वन में छोड़ा जाएगा।
दीपावली के लिए घर मे सफाई करते हुए कृष्णा विहार कालोनी निवासी जगदीश कुमार के घर से उल्लू के छह बच्चे टांड़ पर मिले थे। उन्होंने घर के झरोखे पर जाली लगवाई थी, जिससे उल्लुओं की मां उन्हें छोड़कर चली गई थी। जगदीश कुमार ने उल्लू वन विभाग की टीम को सौंप दिए थे। उन्हें रेंज कार्यालय में रखा गया।
वहां उन्हें खाने के लिए मटन और चिकन दिया जा रहा था। वे रोज एक किलो मांस की दावत उड़ा रहे थे। उल्लुओं का पेट भरने के लिए विभाग ने अब देहरादून से 52 चूहे मंगवाएं हैं। तीन हजार रुपये में ये चूहे मिले हैं। उल्लू के बच्चे दो पिंजरों में बंद हैं। हर रोज एक पिंजरे में एक -एक चूहा छोड़ा जाएगा। उल्लू के बच्चे खुद ही उन्हें मारकर खाएंगे। इसमें निपुण होने और उड़ने लायक होने पर उन्हें वन में छोड़ा जाएगा।
रात में उड़ाते हैं दावत
घर से मिले उल्लू बार्न प्रजाति के हैं। वे रात में सक्रिय होते हैं और दिन में आराम करते हैं। वे चूहों के शिकार की दावत भी रात में ही उड़ाएंगे। हर रोज दो चूहे उल्लुओं के पिंजरे में छोड़े जाएंगे।
इन्होंने उल्लूओं के लिए 52 चूहे मंगवाएं गए हैं। वे खुद ही इन्हें मारकर खाएंगे। चूहे उल्लुओं की आहार श्रंखला में शामिल पसंदीदा शिकार हैं। उल्लू के बच्चे जब उड़ने लायक हो जाएंगे तब ही उन्हें छोड़ा जाएगा।
-महेशचंद्र गौतम, क्षेत्रीय वनाधिकारी
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