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अब मकान में पक्षियों के लिए घोंसला बनाने पर ही होगा नक्शा पास, यूपी के बिजनौर में नगर पालिका की अनोखी पहल

Published: Sat, 24 Oct 2026 09:15 AM (IST)

बिजनौर नगर पालिका ने पक्षियों के संरक्षण के लिए एक अनोखी पहल की है, जिसके तहत अब भवन निर्माण का ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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HighLights

  1. भवन नक्शे के लिए घर में पक्षियों का घोंसला अनिवार्य।

  2. गौरैया व अन्य पक्षियों के संरक्षण हेतु अनूठी पहल।

  3. स्योहारा की गौरेया हवेली से मिली प्रेरणा, 21 लाख खर्च।

संवाद सूत्र, बिजनौर। परिंदों के तेजी से सिमटते प्राकृतिक आवास और आधुनिक भवनों के बीच गौरेया समेत अन्य पक्षियों के लिए सुरक्षित आशियाना तैयार कराने के लिए नगर पालिका ने एक विशेष पहल की है।

अब यह नगर में भवन निर्माण की योजना का हिस्सा बनाने की तैयारी है। योजना के अंतर्गत भवन निर्माण का नक्शा पास कराने के लिए घर में गौरैया व अन्य पक्षियों का घोंसला बनाना आवश्यक होगा। इसका उद्देश्य शहर में पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और विलुप्ति की ओर बढ़ रही गौरेया के संरक्षण को बढ़ावा देना है।

पालिका ईओ विजेंद्र सिंह पाल ने बताया कि पक्षियों व गौरेया के संरक्षण के लिए योजना तैयार की गई है, जिसमें लोगों को इसके लिए प्रेरित करने को नियम बनाया जा रहा। भवन का नक्शा पास कराने से पहले भवन में पक्षियों के लिए आशियाना बनाना अनिवार्य होगा।

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भवन मालिक नक्शा पास कराने के दौरान इस संबंध में शपथ पत्र भी प्रस्तुत करेंगे। इसके भवन के किसी हिस्से में घोसले के लिए स्थान छोड़ा जाएगा और यहां बाजार से लाकर भी घोसला रखा जा सकता है। अलावा तीन तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है। इनमें मुहल्ला शेखान स्थित तालाब को विशेष रूप से विकसित करने की तैयारी है।

यहां गौरेया हाउस, पक्षियों के घोसले व पानी आदि की अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना पर करीब 21 लाख 30 हजार रुपये खर्च होंगे। तालाबों के पानी को स्वच्छ बनाने के लिए एसटीपी प्लांट लगाने की योजना भी है। इससे जल प्रदूषण कम करने और पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

गौरैया हवेली से मिली प्रेरणा

पालिका को इस काम प्रेरणा स्योहारा के मुहल्ला शेखान में स्थित गौरेया हवेली के स्वामियों से मिली। गौरेया हवेली के स्वामी शेख फराज जमाल और नोमान शेख ने पालिका को इसके लिए सुझाव दिया था। इसी से प्रेरित होकर पालिका ने इस योजना पर काम किया।

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दरअसल स्योहारा की गौरेया हवेली सुप्रसिद्ध है, जो करीब 300 वर्ष पुरानी है। शेख फराज व नोमान ने बताया कि उनके दादा शेख जमाल की कोठी है। तभी से यहां गौरेया के घोसले बने थे। दादा उनकी बहुत देखभाल करते थे, उनके पिता की पहल को आज भी पोते संजोए हैं।

आज भी गौरेया हाउस में बड़ी संख्या में गौरेया के घोसले हैं, जिसमें अनुमान के मुताबिक गौरेया समेत करीब दो हजार परिंदों के आशियाने हैं। हवेली को पुराने स्वरूप में रखा हुआ है, जिससे परिदों के घोसले प्रभावित ना हों।

पिछले वर्ष तत्कालीन डीएम जसजीत कौर ने भी हवेली का निरीक्षण किया था और पक्षियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की थी। हर वर्ष मार्च में गौरेया दिवस पर वन विभाग के अधिकारी यहां आकर केक काटते हैं।

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