जासं, भदोही : बारिश के कहर व मौसम की बेरुखी के चलते कालीन उत्पादन कार्य लगभग ठप हो गया है। तैयार कालीनों की फीनिशिग का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। विशेषकर आउटडोर होने वाले कार्य जहां पूरी तरह ठप है वही इनडोर कार्य भी बाधित हैं। इसके कारण कालीन उद्यमियों की चिता बढ़ गई है। बुनकर व मजदूर जहां हाथ पर हाथ रखे घर बैठने को विवश हैं वहीं दूसरे प्रांत व दूर दराज से आकर काम करने वाले पलायन कर चुके हैं। कालीन कारखानों से पानी तो निकल गया है लेकिन कीचड़ अब भी बना हुआ है। इसके चलते चाहकर भी काम शुरू नहीं किया जा सकता।

पिछले दिनों हुई जोरदार बारिश ने कालीन कारखानों को जहां जलमग्न कर दिया था वहीं खुले मैदानों में जल प्लावन की स्थिति अब तक बनी हुई है। हाल यह कि अब तक न तो कालीन कारखाने काम शुरू करने की स्थिति में हैं न ही काम काज पटरी पर आ सका। बारिश ने कालीन नगरी को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया। दो दर्जन से अधिक कालीन कारखानों में जहां पानी घुस गया था वहीं कई कालीन गोदाम भी जलमग्न हो गए थे। यहां तक कि भूमिगत गोदामों में बारिश का पानी घुसने से लोगों को लाखों की चपत लगी।

चिता की बात तो यह है कि बारिश का क्रम थमने के बाद भी काम काज पटरी पर आता नजर नहीं आ रहा है। इसी तरह टेढ़ा, लेटेक्सिग, धुलाई, रंगाई सहित अन्य आउटडोर कार्य भी ठप हो गए हैं। मैदानों में भारी जल-जमाव होने से कारण जल्दी काम शुरू होने की संभावना भी नहीं है। ऐसे में निर्यातकों की चिता बढ़ गई है। एक तरफ उत्पादन ठप है तो दूसरी ओर तैयार कालीनों की फीनिशिग का कार्य प्रभावित है। कालीन निर्यातक श्यामनारायण यादव का कहना है कि कालीन उद्योग को बारिश के चलते भारी क्षति उठानी पड़ी है। समय से आर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है। कालीन व्यवसाय में मौसम का अनुकूल होना आवश्यक है।

Posted By: Jagran

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