जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल समय-समय पर खुलती रही है, लेकिन अधिकारी जानते हुए भी उस पर अंकुश लगाने में फेल हैं। विद्युत विभाग में लिपिक का घूस लेने का यह पहला वाकया नहीं है। इसके पहले भी भदोही तहसील में लेखपाल और ज्ञानपुर में लिपिक घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए घूस लेने और देने वालों पर कार्रवाई के लिए भले ही सूबे की सरकार कानून बना चुकी है। बावजूद इसके सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। तहसीलों में भूमि की नापी हो या फिर वरासत का मामला। विवादित भूमि की रिपोर्ट हो या फिर तालाब, सरकारी भूमि पर कब्जा की शिकायत। इस तरह के मामले आते ही राजस्व निरीक्षक और लेखपालों के मुंह मांगी मुराद मिल जाती है। फिर क्या बगैर हथेली गर्म हुए कलम कभी भी नहीं चल सकती है। खाद्य एवं रसद विभाग और विकास विभाग भी इस घूस से अलग नहीं है। भदोही तहसील में लेखपाल चंद्रभान सिंह और ज्ञानपुर तहसील में लिपिक अरुण श्रीवास्तव को एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ घूस लेते पकड़ चुकी है। रिश्वत के आरोप में पूर्ति निरीक्षक अमरेश भटनागर को भी निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। कलेक्ट्रेट से लेकर तहसील तक बगैर हथेली गरम किए फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। स्थिति चाहे जो हो, लेकिन सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यहां पर तैनात अधिकारी इसको लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं। यदि गंभीर नहीं हैं तो उनके संलिप्तता से भी इन्कार भी नहीं किया जा सकता है। मुर्गा की पार्टी से नाखुश लिपिक ने करा दिया आदेश

कलेक्ट्रेट में तैनात एक लिपिक मुर्गा की पार्टी से नाराज होकर एक कर्मचारी का तबादला करा दिया। दरअसल कर्मचारी हाईकोर्ट से जीतकर आया था। उसी आधार पर उसकी नियुक्ति कर दी गई थी। उसकी तैनाती ज्ञानपुर में की गई थी। इसी दरम्यान लिपिक ने उससे मुर्गा पार्टी मांग लिया। यह कार्यक्रम घर की बजाए कर्मचारी ने बगीचे में करा दिया। इससे नाखुश होकर लिपिक ने तबादला आदेश करा दिया। हद तब हो गई कि इस आदेश को डीएम से अनुमोदित भी नहीं कराया गया। मामला संज्ञान में होने के बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे रहे।

Posted By: Jagran

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