जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर(भदोही) : भाजपा संगठनात्मक चुनाव को लेकर जिले ठंड में भी सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव की तिथि घोषित होते ही मंडल अध्यक्षों की पहरेदारी बढ़ा दी गई है। प्रस्तावक खोजने के लिए पूरे दिन दावेदारों का फोन घनघनाता रहा तो रणनीतिकार दांव-पेंच में जुटे रहे। अपने खेमे और खास लोगों को अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कई दिग्गजों का साख दांव पर है।

जिलाध्यक्ष पद के लिए 20 नवंबर तिथि घोषित कर दी गई है। इसके लिए जोरई स्थित जिला कार्यालय पर स्थान भी निश्चित कर दिया गया है। तिथि की घोषणा होते ही भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई। दावेदार भी प्रस्तावक की तलाश में जुट गए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार मंडल अध्यक्ष जनपद के तीन रणनीतिकारों के इर्द-गिर्द के लोगों को बन जाने से गणित बिगड़ गई है। चुनाव की घोषणा होते ही उनकी पहरेदारी बढ़ा दी गई है। उनके बगैर वह किसी के प्रस्तावक नहीं बन सकते हैं। गाइड लाइन के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने के लिए दो मंडल अध्यक्षों की जरूरत होती है। नामांकन करते समय वह दावेदारों का प्रस्तावक बनते हैं। वर्तमान समय में 11 मंडल अध्यक्षों की सूची जारी की गई है। अधिसंख्य दावेदारों को तो प्रस्तावक खोजे नहीं मिल रहे हैं। वर्तमान में दावेदारों की फेहरिश्त भी बहुत लंबी है। इसमें डा. राकेश दुबे, श्रीनिवास चतुर्वेदी, राजेंद्र दुबे, बालदत्त पांडेय, दिनेश पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय, पूर्व अध्यक्ष संतोष पांडेय, शैलेंद्र दुबे टुन्ना, कन्हैया लाल मिश्र के अलावा वर्तमान अध्यक्ष हौसिला प्रसाद पाठक आदि शामिल हैं। पार्टी के एक जिम्मेदार पदाधिकारी का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया भले ही पूरी कराई जा रही लेकिन अध्यक्ष के नाम की घोषणा पार्टी नेतृत्व की ओर से ही किया जाएगा।

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दांव पर माननीयों की साख

जिलाध्यक्ष चुनाव को लेकर माननीयों की साख दांव पर है। अभी वह किसी का खुलकर समर्थन नहीं कर रहे हैं लेकिन अपने-अपने क्षेत्रों के मंडल अध्यक्षों के खुशामद के साथ चूड़ी टाइट कर दिए हैं। मंडल अध्यक्षों से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह किसी भी दावेदारों के साथ कहीं पर नहीं जाएंगे। अपने घर पर ही मौजूद रहेंगे।

Posted By: Jagran

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