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नौकरी मिलने के बाद परिवार के साथ दिल्ली-मुंबई रहने लगी थीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, भदोही में आठ की सेवा समाप्त

Published: Sat, 26 Sep 2026 10:14 PM (IST)

भदोही में जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पांच सहायिकाओं की सेवा समाप्त कर दी गई है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. भदोही में 8 आंगनबाड़ी कर्मियों की सेवा समाप्त की गई।

  2. ये कर्मी नौकरी के बाद दिल्ली-मुंबई में रह रही थीं।

  3. जिलाधिकारी ने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच के निर्देश दिए।

जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही)। परिवार के साथ मुुुंबई, दिल्ली रहकर जिले में नौकरी करने वाली सुरियावां ब्लॉक की तीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सराय छत्रशाह की प्रीति दुबे, जमुनीपुर अठगवां की संजुलता यादव, पट्टी बेजांव की ज्योति साव और पांच सहायिकाएं महुआपुर केंद्र की ऊषा देवी, हरिपुर की रीतादेवी, कीर्तिपुर की बेबी देवी, लालीपुर की बिंदु, मनापुर की निशा देवी की सेवा जिलाधिकारी के निर्देश पर समाप्त कर दी गई। यह कार्रवाई जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेशचंद्र मिश्र ने की।

विभाग की ओर से इन्हें पूर्व में नोटिस जारी की गई थी लेकिन इनका कोई जवाब नहीं आया। उधर डीएम ने डीपीओ को निर्देश दिया है कि एक-एक केंद्र का सत्यापन कर कर्मियों की उपस्थिति व बच्चों के पंजीयन और उपस्थिति की रिपोर्ट 15 दिन में उपलब्ध कराएं।

विभागीय जांच में पता चला कि कोई छह माह से तो कोई एक साल से परिवार के साथ दिल्ली, मुंबई, सूरत में रह रही हैं। इन केंद्रों पर आने वाले तीन से छह साल तक के कुछ ही बच्चे आते हैं। जबकि किसी केंद्र में 40 तो किसी में 50 बच्चों का पंजीयन हैं।

जिले में 1492 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें एक लाख 25 हजार 690 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें कार्यकर्ता 1272 और सहायिकाओं की संख्या 1195 है। हाल ही में सरकार ने कार्यकर्ता और सहायिकाओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की है।

अक्सर हर विभाग में यह मामले आते हैं कि कुछ कर्मचारी विभाग में तैनाती तो ले लेते हैं लेकिन दूसरी नौकरी या पारिवारिक कारणों से कार्यालय नहीं आते हैं। विभागीय जांच के बाद पता चलता है कि लंबे समय से वे अनुपस्थित चल रहे हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग में अभी तक इस तरह के मामले आते थे लेकिन बाल विकास परियोजना विभाग में भी कर्मी लंबे समय से नहीं आ रहे हैं, यह आश्चर्य की बात है। डीपीओ को निर्देश दिया गया है कि वह हर केंद्रों की जांच कर वस्तु स्थिति की रिपोर्ट दें। -शैलेष कुमार, जिलाधिकारी।

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