जागरण संवाददाता, ज्ञानपुर (भदोही) : सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की ओर से मरीजों को बाजार की दवा लिखे जाने से शनिवार को लोगों का आक्रोश भड़क उठा। मरीजों व उनके तीमारदारों ने बाजार की दवा लिखने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

प्रशासन का दावा है कि अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए जरूरी सभी सुविधाएं व दवाएं उपलब्ध है लेकिन हकीकत में सबकुछ ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कक्ष में दवाओं के एजेंट मौजूद रहते हैं। मरीज को परामर्श देने के बाद चिकित्सक जैसे ही बाहर की दवा लेने की सलाह देकर पर्ची थमाते हैं तो बगल में बैठा एजेंट गाइड करते हुए मरीज को मेडिकल स्टोर का नाम और स्थान की जानकारी देकर दवा खरीदने का मार्ग दर्शन करता है। यह सब खेल उच्चाधिकारी जानते हुए भी चिकित्सकों की मनमानी पर रोक लगाने में विफल हैं।

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बाहर की दवा लिखना पूर्ण रुप से प्रतिबंधित

- विभागीय व्यवस्था की बात करें तो किसी भी दशा में सरकारी अस्पताल में मरीजों को बाहर की दवा नहीं लिखी जानी चाहिए। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल इतर है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लगायत ओपीडी में प्राविधान का उल्लंघन कर धड़ल्ले से बाहर की दवा लिखी जा रही है।

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जिले के अन्य अस्पतालों में भी यही हाल

- बाहर की दवा लिखने का खेल केवल जिला अस्पताल में ही नहीं फल-फूल रहा है। महाराजा बलवंत सिंह अस्पताल भदोही, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां, गोपीगंज, डीघ, औराई व भदोही के चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवा लिखने में कोई गुरेज नहीं किया जा रहा है। सरकार की लाख कोशिश के बाद भी स्थिति में सुधार होता नहीं दिख रहा है। -------------

सभी अस्पतालों में दवाओं की कोई कमी नहीं है। बावजूद इसके अगर चिकित्सक बाहर की दवा लिख रहे हैं तो यह गलत है। अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर मेरी ओर से सतर्क निगरानी रखी जा रही है। इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

- डा. संतोष कुमार चक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी भदोही।

Edited By: Jagran