यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 13, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पत्ती लपेटक रोग की जद में अरहर की फसल
मोढ़ (भदोही): पल -पल बदल रहा मौसम का मिजाज फसलों के लिए खलनायक साबित हो रहा है। खासतौर पर अरहर की फस

मोढ़ (भदोही): पल -पल बदल रहा मौसम का मिजाज फसलों के लिए खलनायक साबित हो रहा है। खासतौर पर अरहर की फसल में कीड़े लगने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो पैदावार प्रभावित हो सकती है।
बताते चलें कि भारी गलन के बाद बारिश से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। रही सही कसर पाले ने पूरी कर दी। पखवाड़े से अधिक समय तक चली शीतलहरी व पाले ने अरहर को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया। अरहर की फसलों में पत्ती लपेटक नामक रोग का प्रभाव देखा जा रहा है। बताते हैं कि समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो पैदावार में भारी कमी आ जाएगी।
डूड़वां धर्मपुरी निवासी कृषि विशेषज्ञ विकासपुरी ने बताया कि अरहर के पौधों के उपरी हिस्से पर तीन चार की संख्या में पत्तियों को लपेट कर कीड़े घर बना लेते हैं, उसमें लगने वाले फूल का रस चूस जाते हैं। परिणामस्वरूप पौधे में दाना नहीं लग पाता। बताया कि एक एकड़ फसल में दो सौ एमएल मोनोक्रोटोफास नामक दवा पानी में मिलाकर छिड़काव करने से कीड़े मर जाते हैं। बताया कि दवा छिड़काव के समय मुंह, चेहरा, व नाक को पूरी तरह से ढ़क लेना चाहिए, साथ ही दोपहर के समय दवा छिड़काव लाभप्रद होता है।
श्री पुरी ने बताया कि रोग के लक्षण की पहचान बेहद आसान है। तीन, चार की संख्या में सटी पत्तियों को निकोलने पर उसमें कीड़े दिखाई देते हैं।
