बस्ती में 5 हजार की लागत से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर लखपति दीदी बनीं संगीता, जैविक खेती को दे रहीं बढ़ावा
बस्ती की संगीता यादव ने मात्र 5 हजार रुपये से वर्मी कंपोस्ट खाद का व्यवसाय शुरू कर लखपति दीदी का ...और पढ़ें
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HighLights
संगीता ने 5 हजार से वर्मी कंपोस्ट व्यवसाय शुरू किया।
स्वयं सहायता समूह से मदद लेकर गांव में दुकान खोली।
पशुपालन और जैविक खेती से आय के स्रोत बढ़ाए।
जागरण संवाददाता, बस्ती। मेहनत, लगन और स्वरोजगार के दम पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कप्तानगंज ब्लाक की ग्राम पंचायत अक्षतपुर निवासी संगीता यादव ने इसका उदाहरण पेश किया है। महज पांच हजार रुपये की लागत से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने का काम शुरू करने वाली संगीता आज लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट, दुकान और पशुपालन को अपनी आमदनी का जरिया बनाया है।
37 वर्षीय संगीता यादव पत्नी उमाशंकर यादव ने बताया कि उन्होंने करीब पांच हजार रुपये की लागत से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने का काम शुरू किया था। अब वह खाद बनाने के साथ उसकी पैकिंग कर गांव में ही बिक्री करती हैं। इससे उन्हें सालाना करीब 30 से 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। इस काम से उन्हें आर्थिक मजबूती मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने का अवसर भी मिला है।
समूह से मिली मदद, गांव में खोली दुकान
संगीता ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से करीब 60 हजार रुपये की आर्थिक मदद लेकर गांव में छोटी दुकान शुरू की। दुकान पर वह खुद बैठकर कारोबार संभालती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है। उनके पति उमाशंकर यादव भी कारोबार में सहयोग करते हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार को आगे बढ़ाकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
सब्सिडी से शुरू किया गाय पालन
संगीता ने बताया कि बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर योजना के तहत उन्होंने ऋण लिया था। इसमें उन्हें 50 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस राशि का उपयोग कर उन्होंने घर पर गाय पालन शुरू किया। पशुपालन से दूध की बिक्री के जरिए हर महीने अतिरिक्त आमदनी हो रही है। इस तरह उन्होंने आय के कई साधन विकसित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
जैविक खेती से किसानों को कर रहीं प्रेरित
स्नातक तक शिक्षा प्राप्त संगीता के दो बेटी और एक बेटा है। तीनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। वह अपने खेतों में जैविक तरीके से खेती करती हैं और रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करतीं। वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल से फसल अच्छी होने पर गांव के अन्य किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं।
संगीता ने संबंधित विभाग से वर्मी कंपोस्ट बनाने का प्रशिक्षण लिया है। उनका कहना है कि मनरेगा के तहत खाद तैयार करने के लिए सेट और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो गांव की अन्य महिलाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
