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वैज्ञानिक तकनीक से मछलियों का सफल प्रजनन, बस्ती में 8 जिलों के मत्स्य पालकों को मिल रहे उन्नत बीज

Published: Fri, 06 Nov 2026 09:14 AM (IST)

बस्ती के साऊघाट पड़िया स्थित राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र में वैज्ञानिक विधि से, हारमोन इंजेक्शन द्वारा लाखों मछली के ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

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जागरण संवाददाता, रुधौली, बस्ती। विकास क्षेत्र साऊघाट के पड़िया स्थित राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र में वैज्ञानिक विधि से मछलियों का प्रजनन कराकर लाखों की संख्या में बच्चे तैयार किए जाते हैं। यहां ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, रोहू, नैनी और भाकुर जैसी प्रमुख प्रजातियों के मत्स्य बीज का उत्पादन किया जाता है। केंद्र पर तैयार होने वाले मछली के बच्चों की मांग बस्ती मंडल समेत आसपास के कई जिलों में रहती है।

यहां से बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर समेत विभिन्न जिलों के मत्स्य पालकों को मछली के बच्चे बिक्री किए जाते हैं।केंद्र प्रभारी राम अनुज शुक्ला ने बताया कि मछलियों के प्रजनन का कार्य प्रत्येक वर्ष 15 मई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलता है। इसके लिए सबसे पहले तालाब से जाल के माध्यम से प्रजनन योग्य मछलियों को बाहर निकाला जाता है।

इसके बाद उन्हें ब्रीडिंग टैंक में रखा जाता है। निर्धारित मात्रा में हारमोन का इंजेक्शन देने के करीब आठ घंटे बाद मछलियां अंडे देती हैं। इन अंडों को विशेष टैंक में एकत्र किया जाता है। इसके बाद उन्हें दूसरे टैंक में स्थानांतरित किया जाता है, जहां पानी के प्रवाह और आपसी गति से अंडों की बाहरी परत टूटती है और उनमें से छोटे-छोटे बच्चे निकलने लगते हैं।

इन्हें स्पान कहा जाता है।उन्होंने बताया कि स्पान निकलने के करीब दो दिन बाद उन्हें नर्सरी में डाल दिया जाता है। यहां उचित वातावरण और देखभाल के बीच उनकी वृद्धि की जाती है। धीरे-धीरे आकार बढ़ने पर इन्हें मत्स्य पालकों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाता है। एक मादा मछली लगभग तीन वर्ष तक बच्चे देने का कार्य करती है। इसके बाद उसकी प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती है।

केंद्र पर अलग-अलग प्रजातियों के मछली बीज का उत्पादन मौसम के अनुसार किया जाता है। अप्रैल में ग्रास कार्प के बच्चे तैयार किए जाते हैं, जबकि मई में सिल्वर कार्प का उत्पादन होता है। वहीं जुलाई में रोहू, नैनी और भाकुर प्रजाति के मत्स्य बीज बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रजनन के निर्धारित समय में अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार उत्पादन की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

केंद्र से तैयार मत्स्य बीज की आपूर्ति केवल स्थानीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर सहित आसपास के जिलों के मत्स्य पालक यहां से बीज खरीदकर अपने तालाबों में मछली पालन करते हैं।

वैज्ञानिक विधि से प्रजनन और नर्सरी में बच्चों की देखभाल के कारण मत्स्य पालकों को मछली पालन के लिए बीज उपलब्ध हो रहा है। इससे क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

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