बस्ती: पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के सियासी भविष्य पर मंडराने लगे संकट के बादल, पूर्व IAS की गिरफ्तारी के बाद उठने लगे सवाल
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में पूर्व आईएएस योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह का राजनीतिक ...और पढ़ें
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HighLights
पूर्व आईएएस योगेश कुमार की गिरफ्तारी से राजकिशोर सिंह पर संकट।
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री का नाम आया।
भर्ती नियमों के संशोधन पर राजकिशोर सिंह के हस्ताक्षर थे।
महेंद्र कुमार त्रिपाठी, बस्ती। समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में सेवानिवृत्त आइएएस एवं तत्कालीन प्रमुख सचिव (पशुपालन) योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन पशुपालन मंत्री और बस्ती के नेता राजकिशोर सिंह के सियासी भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसको लेकर जिले में तरह की तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।
बहुजन समाज पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले राजकिशोर सिंह ने 2002 में हर्रैया विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव जीता था। बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी होने के कारण उन्हें उद्यान मंत्री बनाया गया था। इसी दौरान उनकी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से नजदीकियां बढ़ीं। बाद में वह बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की और पार्टी की सरकार में पशुधन प्रसार मंत्री बने।
इस दौरान राजकिशोर सिंह काफी चर्चा में रहे। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में उनका खासा प्रभाव माना जाता था। बस्ती में जिला पंचायत की राजनीति में भी उनकी सक्रियता रही। उनके राजनीतिक प्रभाव की चर्चा उस समय भी हुई, जब उनकी मां और उनके पुत्र जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
मुलायम सिंह यादव के खास होने की वजह से गोरखपुर में जिला पंचायत के चुनाव में राजकिशोर सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी। इसकी वजह यह थी कि राज किशोर सिंह की सियासी पकड़ मजबूत थी। भाजपा की सरकार आते ही राज किशोर सिंह राजनीतिक कद कम होता देख सपा से नाता तोड़ भाजपा में शामिल हो गए।
वर्ष 2014 में बस्ती से लड़ा लोकसभा चुनाव
सपा सरकार में मंत्री रहते हुए राजकिशोर सिंह वर्ष 2014 में बस्ती संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव मैदान में उतरे। उनका सीधा मुकाबला भाजपा के हरीश द्विवेदी से हुआ। चुनाव के दौरान कई स्थानों पर भाजपा और सपा समर्थकों के बीच विवाद भी हुआ। हालांकि, चुनाव परिणाम में राजकिशोर सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा और हरीश द्विवेदी पहली बार सांसद निर्वाचित हुए।
राजनीतिक हवा देखकर पाला बदलने में माहिर
राजकिशोर सिंह का राजनीतिक सफर दल बदलने के कारण भी चर्चा में रहा। बसपा से अलग होने के बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और मंत्री बने। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने सपा छोड़ दी और भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
भारतीय जनता पार्टी ने भी राजकिशोर को अभी तक कोई खास पद नहीं मिला है। राजकिशोर अभी भी अपनी पुरानी परंपरागत सीट से चुनावी मैदान में आने को तैयार हैं। उधर घोटाले में नाम आते ही राजनीतिक साख पर असर पड़ता दिख रहा है।
तत्कालीन मंत्री राजकिशोर ने भर्ती नियमों में संशोधन पर किए थे हस्ताक्षर
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में संशोधन तत्कालीन पशुपालन मंत्री राजकिशोर सिंह और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार के स्तर पर किया गया था। संशोधन संबंधी दस्तावेजों पर दोनों के हस्ताक्षर थे।
बताया जाता है कि इस बदलाव के बाद मंडल स्तर पर होने वाली चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। 17 मंडलों में 1,198 पदों पर भर्ती के लिए ओएमआर शीट का मूल्यांकन मुख्यालय स्तर पर किया गया और केंद्रीकृत मेरिट सूची तैयार की गई।
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में सेवानिवृत्त आईएएस एवं तत्कालीन प्रमुख सचिव पशुपालन योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी करने के बाद ही मैं आधिकारिक बयान दे पाऊंगा।- राजकिशोर सिंह, पूर्व पशुपालन मंत्री
