बस्ती में कुपोषण का बड़ा संकट: 11 हजार से ज्यादा बच्चे चपेट में, 10 मासूम एनआरसी में भर्ती
बस्ती जिले में 11 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं, जो विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती ...और पढ़ें

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HighLights
बस्ती में 11065 बच्चे कुपोषण की चपेट में, विभाग के लिए चुनौती।
पोषण पुनर्वास केंद्र में 10 गंभीर कुपोषित बच्चों को किया गया भर्ती।
आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा पोषाहार वितरण और स्वास्थ्य जांच अभियान जारी।
महेंद्र कुमार त्रिपाठी, बस्ती। सरकार की ओर से बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए पोषण अभियान समेत तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद बस्ती जिले में बड़ी संख्या में बच्चों का कुपोषित होना चिंता का विषय है। जिले में 11065 ऐसे में जिले को कुपोषण मुक्त बनाना विभाग के सामने बड़ी चुनौती है।
हाल ही में जिले में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान बाल विकास परियोजना की टीमों ने गंभीर कुपोषित बच्चों के घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता की स्थिति की जानकारी ली। अभिभावकों को भी पोषण संबंधी योजनाओं और बच्चों की देखभाल के बारे में जागरूक किया गया।
इसके बावजूद जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 10 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया है। बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी, संतुलित आहार, दवाएं और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

उधर अन्य कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण और कुपोषित बच्चों की पहचान की जा रही है।
यह है रेसिपी
बाल विकास व पुष्टाहार विभाग के अधीन संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए गंभीर तीव्र कुपोषित व मध्यम तीव्र कुपोषित छह माह से एक वर्ष तक के की सेहत को ठीक करने के लिए हर रोज की रेसिपी तय की गई है। जिसमें छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिदिन 110 ग्राम ऊर्जायुक्त मीठा हलवा तथा एक से तीन वर्ष तक के बच्चोंं के लिए 185 ग्राम मीठा हलवा तथा 25 दिन तक एवं तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए बच्चों 210 ग्राम प्रतिदिन मीठा हलवा 25 दिन व 210 ग्राम नमकीन दलिया 12 दिन तक लगातार देने की व्यवस्था है।
नंबर गेम
- गंभीर तीव्र कुपोषित श्रेणी के बच्चों की संंख्या- 3220
- मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या- 7845
- आंंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या-2655
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कुपोषण दूर करने के लिए केवल पोषाहार वितरण पर्याप्त नहीं है। माता को भी स्वस्थ होना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान खानपान ठीक होने पर बच्चा भी स्वस्थ पैदा होगा। इसके बाद बच्चा अपनी उम्र के अनुसार वजन या लंबाई नहीं बढ़ा रहा है, बहुत कमजोर दिखाई देता है, बार-बार बीमार पड़ता है, भूख कम लगती है या उसका विकास अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार में स्वच्छता, बीमारियों की रोकथाम, स्तनपान तथा बच्चों को संतुलित आहार देने के प्रति अभिभावकों की जागरूकता भी जरूरी है।
डा.सीमा त्रिपाठी, विशेषज्ञ।
कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित टीमों के समन्वय से बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने पर विशेष जोर है।
