जागरण संवाददाता, बस्ती: जिले में गरीबों के खाद्यान्न पर डाका डाल ठेकेदार, कथित राइस मिलर व जिम्मेदारों की तिकड़ी चांदी काट रही है। कार्रवाई के नाम पर केवल यहां खानापूर्ति हो रही है। इस बात के पुष्ट प्रमाण भी प्रशासन को मिले, मगर ऊंची रसूख के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

परशुरामपुर स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गोदाम से करोड़ों रुपये का अनाज गायब पाया गया था। हालांकि इस मामले में कार्रवाई हुई, लेकिन गरीबों के खाद्यान्न में खेल का सिलसिला नहीं थमा। पुरानी बस्ती इलाके में पिछले दिनों एक राइस मिल पर सार्वजनिक वितरण व्यवस्था का लाखों रुपये का अनाज पकड़ाया। इस मामले में जैसे तैसे मुकदमा दर्ज हुआ, मगर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। इसके कुछ दिनों बाद फिर आरके राइस मिल पर पीडीएस का अनाज उतरते हुए एसडीएम सदर ने पकड़ा। यह माल लाखों रुपये का था। पकड़े गए माल को लेकर तीन दिनों जिला प्रशासन परेशान रहा। बाद में किसी तरह मामले में राइस मिल के प्रोपराइटर, ट्रक चालक व अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। कार्रवाई फिर औपचारिकता की भेंट चढ़ गई। यह तो महज बानगी है। इसके अलावा जिले में कई स्थानों से गरीबों के खाद्यान्न को बेचने के लिए ले जाते समय पकड़ा गया, मगर सब कुछ औपचारिकता बन कर रह गया। यह सिलसिला शुरू होता है भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से लेकर कोटेदार तक पहुंचने में। गोदाम और गतंव्य के बीच गायब करने की घटनाएं भी जिम्मेदारों की नींद नहीं तोड़ सकी हैं। नतीजतन गरीबों के अनाज पर डाका डाल ठेकेदार, कथित राइस मिलर व अधिकारियों की तिकड़ी जेब भर रही है।

बता दें कि पीडीएस में अनाज की डिमांड जिला पूर्ति विभाग द्वारा संभागीय खाद्य नियंत्रक को जाती है। आरएफसी इस डिमांड को भारतीय खाद्य निगम को भेजता है, जहां से अनाज रिलीज हो पीडीएस गोदाम पर जाता है। इन दोनो के बीच ही अनाज गायब कर दिया जाता है। सबसे खास बात यह है कि पीडीएस गोदाम पर अनाज की तौल की व्यवस्था केवल कागजी है।

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संभागीय खाद्य नियंत्रक प्रदीप कुशवाहा कहते हैं कि खाद्यान्न चोरी के मामले में विभागीय कार्रवाई लगातार हो रही है। गोदाम से खाद्यान्न लेकर जो ठेकेदार जाता है उसका अनुबंध होता है। यदि ऐसे मामले संज्ञान में आते हैं तो कार्रवाई होती है।

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