बरेली, जेएनएन : रुहेलखंड विश्वविद्यालय में प्रोविजनल डिग्री या सर्टिफिकेट के लिए कैश कांउटर पर निर्धारित शुल्क जमा करने पर फार्म दिया जाता है। मंगलवार को सुबह 11 बजे काउंटर खुल गया। लेकिन तेज बारिश की वजह से काउंटर के अंदर पानी भर गया। कम्प्यूटर तक पानी पहुंच गया। जिसकी वजह से काउंटर बंद करना पड़ा। इस दौरान प्रोविजनल डिग्री व माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए आए छात्रों को फार्म लेने के लिए दो घंटे तक इंतजार करना पड़ गया। करीब ढाई बजे तक दोबारा काउंटर खोलकर फार्म जारी किए गए। तब जाकर सर्टिफकेट बनने शुरू हुए। -------------------

यूजीसी के फैसले के खिलाफ हुए छात्र

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराए जाने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया। कहा कि कोरोना महामारी के बीच परीक्षाएं लेने का मतलब छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है। अगर परीक्षाएं होती हैं, छात्र-छात्राएं बहिष्कार करेंगे।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने सात जुलाई से परीक्षाएं प्रस्तावित की थीं। जिसका बीते दिनों खूब विरोध हुआ। जिसके बाद शासन ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर परीक्षाएं कराने को लेकर रिपोर्ट मांगी। कमेटी ने बिना परीक्षाएं छात्रों को प्रमोट करने का सुझाव दिया। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया। इस बीच सोमवार को यूजीसी ने 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने की गाइडलाइन जारी कर दी। जिसका विरोध शुरू हो गया। बुधवार को बरेली कॉलेज के छात्र जिलाधिकारी और कुलपति को ज्ञापन देंगे। -------

यूजीसी का फैसला छात्रों की जिदगी के लिए खतरा है। यदि कोई छात्र-छात्रा कोरोना से संक्रमित हो जाएगा तो क्या उसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन व सरकार लेगी। अगर परीक्षा हुई तो पहले प्रत्येक छात्र का 50 लाख का बीमार कराया जाए। वरना फैसला वापस लिया जाए।

फैज मोहम्मद, छात्र नेता, समाजवादी छात्र सभा

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ऐसे समय में परीक्षा कराए जाने के लिए कहा जा रहा जब कोरोना वायरस की मार से हमारा देश विश्व में तीसरे नंबर पर है। यूजीसी ने भी छात्रों के स्वास्थ्य का कोई भी ख्याल नहीं रखा है। यह निर्णय गलत है।

अजमल अंसारी, एमए, बरेली कॉलेज

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यूजीसी का फैसला गलत है। समाजवादी छात्र सभा इस फैसले के खिलाफ है । यूजीसी से अनुरोध है कि अपना तानाशाही फैसला वापस ले अन्यथा हमें लॉकडाउन में ही पूर्व की तरह सड़को पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

गजेंद्र सिंह पटेल, छात्र नेता, रुहेलखंड विवि ----------

अभी राज्य सरकार की ओर से परीक्षाएं कराने को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं आई है। वहां से जैसे निर्देश आएंगे, हम अपने कार्रवाई करेंगे।

संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक, रुविवि

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