बरेली, (अंकित गुप्ता)। National Annual Rural Sanitation Report : प्रदेश के लगभग सभी जिले ओडीएफ और ओडीएफ प्लस की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। सभी जिले खुले में शौच से मुक्त होने का दावा करते हैं। लेकिन हाल ही में नेशनल एन्युल रूरल सैनिटेशन (नार्स) सर्वे की आई तीसरे चरण की रिपोर्ट इसकी कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है।नार्स सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार उप्र के अभी 47 जिले ऐसे हैं, जिनमें कई परिवारों के पास अब तक शौचालय नहीं हैं और वह खुले में शौच जाने को मजबूर हैंं। नार्स सर्वे की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (एसबीएम) के मिशन निदेशक राजकुमार ने सभी 47 जिलों का सर्वे कराकर छूटे हुए परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

चित्रकूट और एटा की स्थिति ज्यादा खराबः नेशनल एन्युल रूरल सैनिटेशन (नार्स) सर्वे की आई तीसरे चरण की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा खराब स्थिति चित्रकूट और एटा जिले की बताई गई। इसमें बताया गया कि चित्रकूट में अब तक मात्र 65.33 फीसद परिवारों को ही शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 34.77 फीसद परिवार अभी भी शौचालय से दूर हैं। इसी तरह एटा में 80 फीसद परिवारों को शौचालय मिलने और 20 फीसद परिवारों के खुले में शौच जाने की रिपोर्ट दी गई है। इस सूची में 23 जिले शामिल हैं, जो 95 फीसद तक ही लोगों को शौचालय दे सके हैं। इनमें चित्रकूट और एटा के अलावा बांदा, प्रतापगढ़, प्रयागराज, महोबा, संतकबीरनगर, झांसी, मऊ, हमीरपुर, मैनपुरी, भदोही, अलीगढ़, बलिया, आजमगढ़, गोरखपुरा, अमेठी, ललितपुर, सोनभद्र, देवरिया, कौशांबी, बुलंंदशहर और संभल शामिल है।

बरेली मंडल के तीन जिले भी शामिलः नार्स सर्वे की रिपोर्ट में 95 फीसद तक शौचालय से संतृप्त 23 जिलों के अलावा 95 से 99.26 फीसद तक ही शौचालय बनवा पाने वाले 24 और जिले भी शामिल किए हैं। जिसमें बरेली मंडल का बदायूं 98.75 फीसद शौचालय आवंटित कर चुका है, जबकि यहां अभी 1.25 फीसद लोग खुले में शौच जा रहे हैं। वहीं पीलीभीत में 0.74 फीसद और शाहजहांपुर में 3.49 फीसद लोगों के पास अब तक शौचालय नहीं है। इसी तरह रामपुर में भी 1.48 फीसद लोग खुले में शौच जा रहे हैं। इनके अलावा 95 से 99.26 फीसद तक शौचालय वाले जिलों में लखीमपुरखीरी, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, जौनपुर, रायबरेली, लखनऊ, इटावा, गोंडा, बाराबंकी, सुल्तानपुर, हाथरस, मथुरा, कुशीनगर, बलरामपुर, हरदोई, अयोध्या, मिर्जापुर, बहराइच, बस्ती, फीरोजाबाद शामिल हैं।

2021-22 में होगा सेन्सस सर्वेः स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के मिशन निदेशक राजकुमार ने इन सभी 47 जिलों को पत्र लिखते हुए निर्देशित किया है कि नार्स सर्वे की रिपोर्ट को देख लें और ठीक से सर्वे कराकर जिलों को पूर्ण रूप से शौचालय से आच्छादित करें। जिससे 2021-22 में होने वाले सेन्सस सर्वे और भारत सरकार के अन्य सर्वे में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो पाए।

स्थायित्व और स्थिति जानने को हुआ सर्वेः पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उप्र में स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त की स्थिति और स्थायित्व को देखने के लिए नेशनल एनुअल रूरल सेनिटेशन सर्वे (नार्स) कराया गया। यह सर्वे का तीसरा चरण था, जिसमें शौचालय की उपयोगिता और खुले में शौच की स्थिति का आंकलन किया गया। बदायूं डीपीआरओ श्रेया मिश्रा का कहना है कि नार्स सर्वे की रिपोर्ट में बदायूं में भी ऐसे परिवार पाए गए हैं, जिनके पास शौचालय नहीं है। हालांकि यहां 1.24 फीसद परिवार छूटे बताए गए हैं।

आंकड़ों में देखें तो करीब ढाई से तीन हजार परिवार बताए जा रहे हैं। इन्हें भी शौचालय दिए जाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही छूटे परिवारों को चिन्हित कर उनके शौचालय भी बनवाए जाएंगे। मंडलीय उपनिदेशक पंचायती राज महेंद्र सिंह का कहना है कि नार्स सर्वे की रिपोर्ट को देखते हुए सभी जनपदों को सर्वे कराने के लिए कहा गया है। जो छूटे परिवार हैं, उन्हें शौचालय दिया जाए। हमारे यहां बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर ही शामिल है। इसमें पीलीभीत और बदायूं की स्थिति ठीक है, शाहजहांपुर में कुछ संख्या अधिक है। जल्द सभी परिवारों को चिन्हित कराया जाएगा।

Edited By: Samanvay Pandey