बरेली, जेएनएन। UP Vidhan Sabha Chunav 2022 :  गत विधानसभा चुनाव में महज एक सीट पर सिमटी सपा का जोर इस बार जिले में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर है। यही कारण है कि इस बार टिकट तय करने में काफी समय लगा। प्रत्याशियों के नाम तो लगभग तय हो चुके थे, लेकिन आखिरी समय तक दावेदारों में संभावनाएं देखी जाती रहीं। पहली बार पार्टी हाईकमान ने सूची जारी करने की बजाय सिंबल दिए। ताकि नामांकन से पहले किसी तरह का असंतोष न हो। अगर पार्टी के टिकट आवंटन को देखें तो इस बार चार ओबीसी, एक मुस्लिम व एक अनुसूचित जाति से प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। 2017 के चुनाव में कांग्रेेस गठबंधन के साथ लड़ी सपा ने पांच सीटों में एक मुस्लिम, एक क्षत्रिय, दो ओबीसी व एक अनुसूचित जाति के प्रत्याशी को उतारा था। इसमें महिला प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक शकुंतला देवी शामिल थीं। जबकि गठबंधन से कांग्रेस के खाते में गई सीट पर पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद चुनाव लड़े थे। हालांकि उन्हें हार मिली थी।

अवधेश पर भारी पड़ा राजेश का गणित

इस बार टिकट को लेकर दो सीटों पर तो पार्टी नेतृत्व ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी थी, लेेकिन शेष सीटों में सबसे ज्यादा असमंजस ददरौल सीट पर था। यहां पूर्व मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा के बेटे राजेश वर्मा व पूर्व मंत्री अवधेश वर्मा दोनों ही मजबूत दावेदार थे। दोनों ही काफी समय से प्रचार में भी जुटे हुए थे, लेकिन आखिरी समय में राजेश वर्मा अवधेश पर भारी पड़े और उनका टिकट तय हो गया।

रोशन ने बिगाड़े दावेदारों के समीकरण

तिलहर सीट पर रोशन सिंह वर्मा ने दावेदारों के समीकरण बिगाड़ दिए। यहां पर लगभग 14 दावेदार थे। जिनमें सलोना कुशवाहा सबसे ज्यादा दमदारी से डटी थीं, लेकिन रोशनलाल वर्मा भारी पड़े। सपा ने उन्हें अपना सिंबल दिया। जिसके बाद पार्टी में असंतोष के स्वर भी उठे, लेकिन अब सबकुछ सही बताया जा रहा है।

तीन चुनावों में प्रदर्शन

2017 के चुनाव में सपा जलालाबाद सीट जीती थी। जबकि अन्य सभी सीटों पर पार्टी प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे। 2012 में ददरौल, कटरा व पुवायां सीट पर पार्टी को जीत मिली थी। शेष सीटों पर पार्टी प्रत्याशी रनर रहे थे। 2007 में सपा पुवायां व तिलहर सीट जीती थी। जबकि तीन पर पार्टी प्रत्याशी रनर रहे।

Edited By: Ravi Mishra