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अपनी ही आवाज में फंसेंगे साइबर ठग: UP पुलिस के 'यक्ष एप' पर वॉइस रिकॉर्डिंग अपलोड, AI से होगी पहचान

Published: Fri, 16 Oct 2026 05:30 AM (IST)

यूपी पुलिस ने साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए 'यक्ष एप' का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसमें उनकी आवाजें ...और पढ़ें

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HighLights

  1. यक्ष एप पर अब साइबर अपराधियों की आवाज रिकार्ड कर होगी अपलोड

  2. जिले में अब तक 30 साइबर अपराधियों की आवाज एप पर की गई अपलोड

अनिल कुमार, बरेली। चोरी, लूट, डकैती से अधिक साइबर अपराध हो रहा है। अपनी आवाज और बोलने के अंदाज से लोगों को झांसे में फंसाकर साइबर ठग लाखों रुपये लूट लेते हैं। अब साइबर ठगों की यही आवाज उनके लिए जाल का काम करेगी। यूपी पुलिस ने साइबर अपराधियों पर नकेल के लिए उनकी आवाज रिकार्ड करने के साथ यक्ष एप पर अपलोड करना शुरू कर दिया है।

इससे यदि किसी दूसरी जगह भी साइबर अपराधी शामिल रहा होगा तो उसका तुरंत एप पर सर्च करते ही पता चल जाएगा। बरेली में अब तक 30 साइबर अपराधियों की आवाज रिकार्ड कर एप पर अपलोड की गई है।

डीजीपी ने 30 सितंबर को सभी जिलों को इस संबंध में पत्र जारी किया था। अभी तक यक्ष एप का इस्तेमाल अपराध एवं अपराधियों की निगरानी, सत्यापन और उनके संबंध में उपलब्ध सूचनाओं को एकीकृत रूप से संकलित करने के लिए किया जा रहा था। इसमें अपराधियों के आपराधिक इतिहास के साथ-साथ फोटो, आवाज एवं अन्य विवरण संकलित किए जाते हैं।

डीजीपी ने निर्देश दिए कि अपराधियों की फीडिंग और सत्यापन के समय उच्च गुणवत्ता की आवाज यक्ष एप पर अपलोड की जाए ताकि भविष्य में व्वाइस सर्च या मैचिंग एवं एआइ आधारित विश्लेषण अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

इसी के तहत साइबर अपराधों के साथ-साथ जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण और अन्य महत्वपूर्ण अपराधों में संलिप्त अभियुक्तों की आवाज रिकार्ड करने का आप्शन दिया गया है।

ऐसे में साइबर अपराधी मोबाइल काल, इंटरनेट मीडिया, आनलाइन प्लेटफार्म एवं अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आवाज से पहचान करने में काफी आसानी होगी।

साइबर थानों की ओर साइबर अपराधों में संलिप्त अपराधियों की वाइस रिकार्डिंग और थानों की ओर से साइबर अपराधियों के साथ-साथ जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण और अन्य महत्वपूर्ण अपराधों में शामिल अपराधियों की आवाज रिकार्ड कर अपलोड करेंगे।

थाना प्रभारी सीयूजी नंबर से लागिन करेंगे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि डीजीपी के आदेश पर साइबर अपराधियों की आवाज सहित अन्य रिकार्ड यक्ष एप पर अपलोड करना शुरू कर दिया गया है। इससे साइबर अपराधियों को पकड़ने में काफी मदद मिलेगी।

जिले में 33,684 अपराधियों का रिकार्ड एप पर हुआ अपलोड

डीजीपी के आदेश के बाद बरेली पुलिस ने भी एप पर रिकार्डिंग अपलोड करनी शुरू कर दी है। अब तक अलग-अलग अपराधों में बरेली पुलिस की ओर से 33,684 अपराधियों की आवाज सहित अन्य रिकार्ड एप पर अपलोड किए जा चुके हैं।

बरेली के कोतवाली थाना में ही 1603 अपराधियों का रिकार्ड अपलोड किया जा चुका है। अब 33 तरह के अपराधों का रिकार्ड एप पर उपलब्ध होगा। इस तरह से प्रदेश में लगभग 25 लाख अपराधियों का रिकार्ड पुलिस के पास उपलब्ध हो गया है।

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