बरेली, जेएनएन। Illegal mining in Bareilly : बरेली में खनन बेलगाम है। राजस्व और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो गांवों में हुई छापामारी में अवैध खनन कर रहीं दो जेसीबी व एक ट्रैक्टर-ट्राली को पकड़ा गया। तीन वाहनों को सीज किया गया।मीरगंज एसडीएम ममता मालवीय और तहसीलदार को म्यूडी बुजुर्ग एवं संग्रामपुर में अवैध खनन की सूचना मिली। उन्होंने लेखपाल व दुनका पुलिस चौकी इंचार्ज को छानबीन करने के लिए कहा। राजस्व टीम व दुनका चौकी पुलिस म्यूडी बुजुर्ग गांव पहुंची। वहां पर नवाब पुत्र गुच्छन खां जेसीबी चलवा रहे थे।

ड्राइवर अनीश पुत्र मोटा से परमीशन संबंधी दस्तावेज मांगे मगर वह नहीं दिखा सका। खेत उत्तराखंड सरकार की एक मंत्री का बताया जा रहा है। पुलिस आरोपित को पकड़कर थाना ला रही थी। इसी बीच संग्रामपुर में एक जेसीबी के चलने की सूचना मिली। दोनों टीमें वहां पहुचीं तो रामोतार पुत्र लेखराज के खेत में जेसीबी चल रही थी। वहां एक ट्राली भी खनन में लगी थी। पुलिस ने ड्राइवर महेन्द्र पुत्र प्यारे लाल निवासी परतापुर थाना शाही से परमीशन के कागज मांगे पर वह नहीं दिखा पाया।

टीमें दोनों जेसीबी व ट्रैक्टर ट्राली को चौकी ले आई। अवैध खनन के आरोप में वाहनों को सीज कर दिया। रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को प्रेषित कर दी। इस कार्रवाई से खनन माफिया में खलबली मच गई। तहसीलदार अरविंद कुमार तिवारी ने बताया कि शासन-प्रशासन अवैध खनन के सख्त खिलाफ है। शिकायत मिलने पर लेखपाल पुष्पेंद्र सिंह, लोकेंद्र कुमार को भेजा गया। साथ में पुलिस टीम भी गई थी।

टीम को देख भागा झोलाछाप, दर्ज होगा मुकदमा : जिले में झोलाछापों का मकड़जाल फैला हुआ है। कई लोग झोलाछापों से इलाज कराकर जान गवां चुके हैं, बावजूद इसके झोलाछापों पर लगाम मुश्किल हो गई है। हैरत की बात है कि छापेमारी के दौरान झोलाछाप इलाज करते मिलते हैं, लेकिन टीम के हाथ नहीं लग पाते। फिलहाल टीम ने झोलाछापों की दुकान और एक लैब सील कर दी है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।

रिछा के भोपतपुर में गुरुवार को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो यहां तेजपाल नाम का एक झोलाछाप टीम आने की सूचना मिलते ही क्लीनिक बंद कर भाग गया। टीम ने जब सीएमओ को इस बाबत सूचना दी तो सीएमओ ने फौरन झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद टीम पास की एक अन्य दुकान पर पहुंची। यहां क्लीनिक और गेट पर ही डॉ.शकील का नाम लिखा था। मरीजों का इलाज कर रहे युवक से जब मेडिकल डिग्री संबंधी दस्तावेज मांगे गए तो वह नहीं दिखा सका। टीम ने क्लीनिक सील कर दिया। वहीं पास में ही चल रही अन्नू पैथोलॉजी का भी रजिस्ट्रेशन नहीं था।

इस लैब को भी सील कर दिया गया। टीम में डॉ. दिनेश कुमार गंगवार, मोहम्मद शहरान अली और महेंद्र यादव शामिल रहे।क्या माननीय के कहने पर हो रही कार्रवाईसूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के पास किसी माननीय ने झोलाछापों के सक्रिय होने की सूचना दी थी। जिसके बाद ही टीम ने गुरुवार को छापेमारी की है।

इससे पहले भी झोलाछापों के कई मामले विभागीय कर्मचारियों के पास आए लेकिन कार्रवाई के स्थान पर साठगांठ कर ली गई।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि झोलाछापों के खिलाफ पिछले कुछ दिनों में दर्जनों कार्रवाई हुई हैं। टीम देखकर भागे एक आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। अन्य सभी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होगी।

Edited By: Samanvay Pandey