बरेली, शुभम शर्मा। Tokyo Olympic 2020 : टोक्यो ओलिंपिक के बॉक्सिंग रिंग में सिर्फ एक हादसे की वजह से सलेक्शन ट्रायल से महरूम हुई बरेली की बेटी नंदिनी का जोश कम नहीं हुआ। घुटने की चोट के बावजूद अगले ओलिंपिक के लिए रिंग में पसीना बहाने लगी हैं। उनका एक ही ख्वाब है, भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों में उनका भी नाम हो। पॉवर पंच के सहारे सोना की चाहत रखने वाले नंदिनी से बरेली को भी उम्मीदें हैं।

टोक्यो ओलिंपिक में बॉक्सिंग खेल की तैयारी कर रही नंदिनी के साथ वर्ष 2019 में सड़क दुर्घटना हो गई। उन्हें घुटने में चोट लगी थी। टोक्यो ओलिंपिक के लिए उन्हें ट्रायल में शामिल होना था। लेकिन घुटने की चोट की वजह से वह ठीक नहीं हो सकी। नंदिनी अब घर पर ही प्रैक्टिस कर रही है।

बरेली की बेटी ममांसा हरियाणा के रोहतक में नेशनल बाक्सिंग एसोसिशन में जीत के लिए बारीकियां सीख रहीं हैं। उनके कोच शायबर अली खान हैं। इससे पहले ममांसा ने नेशनल में तीन बार कांस्य और स्टेट में एक बार रजत व दो बार सोने का पदक जीतकर बरेली का मान बढ़ाया है। उनकी उम्र कम होने की वजह से बॉक्सिंग के ट्रायल में शामिल नहीं हो सकी। पांच साल पहले से उनकी मेहनत अगले ओलिंपिक में सोने की चाहत को पूरा कर सकती है।

दो वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बाक्सिंग के ट्रायल देने के लिए गई थी। लेकिन, रास्ते में एक्सीडेंट होने की वजह से घुटने का आपरेशन हुआ। अभ्यास प्रभावित हुआ। लेकिन, अब पक्के इरादों से फिर अभ्यास में जुट गई हूं। -नंदिनी, आकांक्षा इन्क्लेब

ओलिंपिक में ट्रायल देने के लिए एक साल उम्र कम रह गई। वरना, मैं भी इसके लिए पूरी तैयारी से जुटी हुई थी। उम्र के आड़े आने से मायूसी हुई। लेकिन, फिर पापा की कही बात को याद किया कि जो होता है अच्छे के लिए। अब, अगले ओलिंपिक में सोने का पंच लगाऊंगी। - ममांसा पांडे, कोहाड़ापीर

नंदिनी का सफर :

2016-राज्य स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप, स्वर्ण पदक

2017- राज्य स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप, स्वर्ण पदक

2018- खेलो इंडिया, कांस्य पदक

2018 वीमेन नेशनल, कांस्य पदक

ममांसा का सफर :

2018- राज्य स्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप, रजत पदक

2019- यूपी स्टेट बाक्सिंग चैंपियनशिप, स्वर्ण पदक

2018- नेशनल जूनियर चैंपियनशिप, कांस्य पदक

2019- नेशनल जूनियर चैंपियनशिप, कांस्य पदक

Edited By: Ravi Mishra