बरेली, जेएनएन। प्लाईवुड कारोबारी संजीव की हत्या की गुत्थी उलझती ही जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध का चेहरा कैद होने के बाद उसे सार्वजनिक किया गया। लोगों से मदद मांगी गई लेकिन, 48 घंटे बाद भी कैद चेहरे की पहचान नहीं हो पाई है। चूंकि, संजीव मूलरूप से पंजाब के रहने वाले हैं। उत्तराखंड पड़ाेस में है। ऐसे में अंदेशा है कि पंजाब व उत्तराखंड के हत्यारों के जरिए संजीव को मौत के घाट उतारा गया। लिहाजा, पुलिस अब पंजाब व उत्तरांखड पुलिस के जरिए सीसीटीवी में कैद युवक की पहचान कराने में जुटी है। पूरे मामले में अफसर अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सीयूजी नंबर तक पीआरओ को थमा दिये हैं।

प्रेमनगर के माडल टाउन निवासी प्लाईवुड फैक्ट्री मालिक संजीव गर्ग की 20 जनवरी को हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से हमला कर संजीव की हत्या की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में उनके सिर व मुंह पर गंभीर चोट के साथ बायें हाथ पर चोट के निशान थे। हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। संजीव की फैक्ट्री से लेकर घटनास्थल के आस-पास के करीब सौ से अधिक सीसीटीवी के फुटेज देखे गए। फुटेज में ही 25 जनवरी को संजीव की गाड़ी के पास एक संदिग्ध दिखाई पड़ा। पुलिस ने उसकी फुटेज इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर पहचान कराने में मदद मांगी लेकिन, 48 घंटे बाद भी संदिग्ध की कोई शिनाख्त नहीं हो पाई है। पता चला कि संजीव मूलरूप से पंजाब के रहने वाले हैं। ऐसे में पुलिस पंजाब के साथ उत्तरांखड के नेटवर्क पर भी काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो एक विवाद में करीब डेढ़ महीने पहले ही संजीव की हत्या की पटकथा लिख दी गई थी। जिसे 20 की रात सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। इधर, पूरे प्रकरण में संजीव की महिला मित्र, करीबियों से पूछताछ के बाद पुलिस फिर पहले दिन पर ही पहुंच गई है। पूरे मामले में जहां स्वजन कुछ भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं, वहीं पुलिस भी पूरे प्रकरण में कुछ भी बोलने से बच रही है।

30 सेकेंड के स्टापेज में छिपा हत्या का राज: संजीव की गाड़ी में लगे जीपीएस के मुताबिक, उनकी गाड़ी करीब 30 सेकेंड के लिए सर्वाधिक जौहरपुर रामपुर रोड पर रुकी। अंतिम प्वाइंट घटनास्थल दिखा। ऐसे में साफ है कि किसी करीबी ने ही संजीव की गाड़ी रुकवाई। फिर गन प्वाइंट पर लेकर उन्हें फतेहगंज पश्चिमी की सुनसान रोड पर ले जाया गया और वारदात को अंजाम दिया गया। जिस हिसाब से वारदात को अंजाम देने के बाद उसे हादसे का रुप देने की कोशिश की गई उससे भी स्पष्ट है कि हत्यारों ने पूरी रेकी कर रखी थी।

48 घंटे में राजफाश का दावा फेल: शुरुआती इनपुट का हवाला देकर पुलिस ने दावा किया कि 48 घंटे के भीतर हत्याकांड का राजफाश कर दिया जाएगा। अब पुलिस अपनी ही कहानी में उलझ गई है। वारदात के एक सप्ताह से अधिक का समय बीत गया लेकिन, पुलिस अब तक जांच की लाइन ही तय नहीं कर पाई है। विरोधाभासी बयानों की जांच, सीडीआर व सीसीटीवी फुटेज पर ही काम का दावा किया गया है। आइआइए के पदाधिकारियों ने हत्याकांड का राजफाश न होने पर नाराजगी व्यक्त की है और शीर्ष नेतृत्व तक शिकायत की बात कही है।

Edited By: Vivek Bajpai