जेएनएन, पीलीभीत : उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं रिटायर्ड आइपीएस अधिकारी बृजलाल ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर विपक्षी दलों पर भी जमकर निशाना साधा। कहा कि नए कानून का सबसे ज्यादा फायदा अनुसूचितों को मिलेगा। लिहाजा इस कानून के बारे में गलत जानकारियां देकर लोगों को गुमराह करने वाले अनुसूचित विरोधी हैं। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें सीएए के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से दो दिवसीय दौरे पर भेजा था। वह शुक्रवार सुबह लोक निर्माण विभाग के अतिथिगृह में पत्रकारों से भी मुखातिब हुए।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से प्रताडि़त होकर यहां आए लोगों में सबसे बड़ी संख्या नमोशुद्र (अनुसूचित) की है। नया कानून लागू होने से उन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। जबकि बाहर से आए घुसपैठियों को किसी भी हाल में नागरिकता नहीं दी जाएगी क्योंकि घुसपैठिए हमारे देश पर बोझ बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पहले हिंदू, सिख, बौद्ध की आबादी करीब 23 फीसद हुआ करती थी, जो वर्तमान में सिर्फ 2.8 फीसद रह गई है।

बांग्लादेश में पहले 22 फीसद अल्पसंख्यक थे और अब महज सात फीसद। भारत में पहले नौ फीसद अल्पसंख्यक आबादी थी, लेकिन वर्तमान में 14 फीसद है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का उद्देश्य नागरिकता देना है, किसी की नागरिकता छीनना नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा डॉ. भीमराव आंबेडकर का विरोध किया था।

वर्ष 1944 में काउंसटेंसी असेंबली के चुनाव में बाबा साहब को जोगेंद्र नाथ मंडल से हरवाया गया था। बाद में 1946 के चुनाव में बाबा साहब ने बंगाल की खुलनाजैसोर सीट से चुनाव जीता था। बंटवारे के दौरान खुलनाजैसोर को पाकिस्तान के हिस्से में शामिल कर दिया गया था। बाबा साहब ने भारत में रहने का निर्णय लिया था, जबकि जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान चले गए थे।

बाबा साहब और जोगेंद्रनाथ मंडल दोनों ही कानून के बड़े विद्वान थे। बाबा साहब भारत तो जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान की संविधान सभा के अध्यक्ष बने थे। बाद में दोनों ही अपने-अपने देश के पहले कानून मंत्री बने थे। वर्ष 1947 से 1950 के बीच पाकिस्तान में हुए दंगों में हिंदू, सिखों और बौद्धों का जिस तरह से कत्लेआम किया गया था, उससे आहत होकर जोगेंद्र नाथ मंडल भागकर भारत आ गए थे।

मंडल के कहने पर ही बड़ी संख्या में नमोशूद्र पाकिस्तान में जाकर बसे थे, जो बाद में भारत वापस आ गए थे। लेकिन उन लोगों को नागरिकता नहीं मिल रही थी। अब इस कानून से इन लोगों की दिली हसरत पूरी हो सकेगी। उन्होंने दावा किया कि नए कानून के तहत जिन्हें नागरिकता दी जाएगी। उनमें तकरीबन 75 फीसद अनुसूचित हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के नेता भी नए कानून से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लेकिन स्वार्थवश गलत जानकारी देकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।  

Posted By: Abhishek Pandey

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