जेएनएन, बरेली : आंवला तहसील क्षेत्र के गांव ढकिया के प्रधान से सात लाख रुपये वसूलने वाले दो दारोगा समेत पांच के खिलाफ थाना अलीगंज में मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जांच में रुपये वसूलने के आरोप प्रथम दृष्टया सही मिले हैं। जिस पर एसएसपी ने चारों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है।

 ऐंठपुर के जंगल में ले जाकर बनाया वीडियो : सोमवार को ढकिया के प्रधान छत्रपाल ने ग्रामीणों के साथ अलीगंज थाने पहुंच कर घेराव किया था। उनका आरोप था कि आठ दिसंबर को वह अपनी ननिहाल बिशारतगंज के गांव मिलक बहादुरगंज से वापस आ रहे थे। उसी दौरान गांव भीकमपुर के पास दारोगा नितिन शर्मा और मुकेश कुमार ने सिपाही देवेंद्र कुमार, धनंजय व एक होमगार्ड से उनकी कार रुकवाई। कार में मादक पदार्थ होने की बात कही और तलाशी लेने लगे। जब कार में कुछ नहीं मिला तो सभी पुलिस कर्मी कार समेत उन्हें ऐंठपुर के जंगल में ले गए। वहां कार में दारोगा नितिन ने मादक पदार्थ रखकर वीडियो बनाया। फिर उसे थाना अलीगंज ले गए।

निलंबित कर सभी पर दर्ज हुअा  मुकदमा : प्रधान छत्रपाल ने बताया कि थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने का डर दिखाया। सात लाख रुपये लेने के बाद उसे छोड़ा गया। छत्रपाल ने मामले की तहरीर एसपी देहात को दी थी। जिस पर मामले की जांच सीओ आंवला को दी गई थी। मंगलवार दोपहर दो बजे के बाद प्रधान छत्रपाल की तहरीर पर दारोगा नितिन शर्मा, मुकेश कुमार, सिपाही देवेंद्र, धनंजय व एक अज्ञात होमगार्ड के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (7 व 13) व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। देर शाम एसएसपी शैलेश पांडेय ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए सभी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया। विभागीय जांच के आदेश भी दिए।

मामले की जानकारी होने पर सीओ को जांच दी थी। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर चारों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रकरण की जांच जारी रहेगी। - शैलेश पांडेय, एसएसपी 

अपने ही बुने जाल में फंस गए दाराेगा और सिपाही : ढकिया के प्रधान छत्रपाल से सात लाख रुपये वसूलने वाले दोनों दारोगा और सिपाही अपने ही बुने जाल में फंस गए। मामला तूल पकड़ा तब आनन-फानन में रकम वापसी करने का प्रयास किया। जिसमें एक भाजपा नेता ने भी अहम भूमिका अदा करने की कोशिश की। सूत्रों की मानें तो रविवार को दोनों दारोगा ने गैनी के एक सिपाही और होमगार्ड के कहने पर प्रधान को रोका था।

रुतबे के हिसाब से मांगे थे 15 लाख, 07 में की डील : प्रधान के नाम और रुतबे के अनुसार उनसे पहले 15 लाख रुपये मांगे गए। बाद में डील सात लाख में पक्की हुई थी। प्रधान ने अपने परिजन से जब इसकी चर्चा की तो लोगों ने इस वसूली के विरोध में सोमवार को थाने का घेराव किया था। करीब छह-सात घंटे हंगामे के बाद भी आरोपित पुलिस कर्मियों के हौसले बुलंद थे। मंगलवार को जब मामले ने तूल पकड़ा तब सभी अारोपित बैकफुट पर आए गए।

कार्रवाई न करने का प्रधान से शपथपत्र भी बनवाया : दोनों दारोगा और सभी आरोपित पुलिसकर्मी सुबह से ही रकम वापस देने की जुगत में लग गए। इसकी भनक अधिकारियों को थी। आरोपित पुलिस कर्मियों ने एक भाजपा नेता को बीच में डालकर रुपये वापस करने की बात कही। रकम वापस करते वक्त ग्राम प्रधान से शर्त रखी की वह अब कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। इसके लिए बाकायदा एक शपथ पत्र भी तैयार किया गया। इस पर हस्ताक्षर भी लेने के प्रयास किए, लेकिन प्रधान ने इन्कार कर दिया। हालांकि, रुपये वापसी के बाद कोई भी कार्रवाई न करने की बात पर हामी भर दी थी।

Posted By: Abhishek Pandey

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