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बरेली [अतीक खान] : इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्टिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (आइ टिपल-ई) की राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रसार प्रतियोगिता में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टीम का चयन हुआ है। अगामी 30-31 अगस्त को पुणे में होने वाली प्रतियोगिता में रुविवि के इंजीनियरिंग छात्र शांतनु पांडेय और अय्यूब खान भाग लेंगे। इन्होंने युवाओं को टेक्नोलॉजी के प्रति प्रेरित कर यह उपलब्धि हासिल की है।
आइ टिपल-ई ने टेक्नोलॉजी के प्रति आकर्षण बढ़ाने और उसके सही उपयोग के उद्देश्य से प्रतियोगिता रखी गई थी। ताकि इंजीनियरिंग छात्र स्कूल-कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और समझाएं। रुविवि के इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय ऋषिवाल के नेतृत्व में बीटेक के छात्र शांतनु पांडेय और अय्यूब खान ने पंडित दीनानाथ मिश्र इंटर कॉलेज और नालंदा पब्लिक स्कूल के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के दो विद्यालय चुने।
विद्यार्थियों को बताया कि उनकी कक्षाओं में प्रोजेक्टर नहीं हैं, पर अधिकांश विद्यार्थियों के पास मोबाइल जरूर है। आज कई ऐसे एप हैं, जिन्हें डाउनलोड करके ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं। लेक्चर सुन सकते हैं। सोशल मीडिया-फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर, टिक-टॉक आदि समय बिताने के बजाय इसका सही उपयोग करें।

तकनीक से ताकतवर बनें लड़कियां 

डायल-100 से लेकर से लेकर कई आपात नंबर और एप ऐसे हैं, जहां लड़कियां अपनी शिकायत दर्ज कर सकती हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल करें। आस-पास या कहीं कोई घटना हों, तो सूचना दें। टीम ने लड़कियों को बताया कि वह तकनीक के जमाने में वह काफी ताकतवर हैं। स्पोर्ट्स, व्यवसाय, गर्वनेंस, योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

ऐसे हुआ चयन
यूपी रीजन में आयोजित प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाली टीमों के पढ़ाने-समझाने की वीडियो देखी गईं। विद्यालय, विद्यार्थी और प्रधानाचार्य से फीडबैक लिया गया। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीम को राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए चुना गया है।

आइ टिपल-ई का तंत्र
आइ टिपल-ई दुनिया भर में दस रीजन में बंटी है। एशिया इसके दसवें रीजन में आती है। भारत में इसके भाग बंटे हैं। यूपी सेक्शन में चार टीमों का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इसमें रुविवि के अलावा कानुपर की दो और देहरादून की एक टीम शामिल है।

आइ टिपल-ई की यह बेहतरीन मुहिम है। इसके अंतर्गत युवाओं को भविष्य में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर की जानकारी दी जा रही है। सही उपयोग सिखाया जा रहा है। तकनीक से सदुपयोग से जीवन बदल सकते हैं। चयनित चारों टीमों को बधाई। -डॉ. विनय ऋषिवाल, समन्वयक यूपी आइ टिपल-ई

Posted By: Abhishek Pandey

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