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SRMS Convocation: 'मरीज की पीड़ा समझें, AI के दौर में अब सिर्फ डॉक्टर नहीं महान डॉक्टर की जरूरत...'

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:44 PM (IST)

एसआरएमएस के 13वें दीक्षा समारोह में 388 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिसमें डाॅ. स्तुति और डाॅ. स्पर्श को श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल के साथ नकद पुरस्कार मिला।

श्री राममूर्ति स्मारक मेडिकल कालेज के दीक्षा समारोह में सम्मानित होने के बाद डिग्रियां दिखाते मेधावी। सौजन्य आयोजक

श्री राममूर्ति स्मारक मेडिकल कालेज के दीक्षा समारोह में सम्मानित होने के बाद डिग्रियां दिखाते मेधावी। सौजन्य आयोजक

HighLights

  1. 13वें दीक्षा समारोह में 388 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार

जागरण संवाददाता, बरेली। एसआरएमएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, इंस्टीट्यूट आफ अलाइट एंड हेल्थ केयर साइंसेज और कालेज आफ नर्सिंग के 13वें दीक्षा समारोह में 388 विद्यार्थियों को उपाधियां और प्रशस्ति पत्र प्रदान की गईं। इसमें एमडी व एमएस के 78 विद्यार्थी, एमबीबीएस के 113, एमएससी आइएएचएस के 113, आइएएचएस बीएससी के 118, आइएएचएस एमएससी 13 और नर्सिंग बीएससी के 66 विद्यार्थी शामिल रहे।

श्रेष्ठ शैक्षिक प्रदर्शन करने वाले मेडिकल, पैरामेडिकल और नर्सिंग के 53 विद्यार्थियों को ट्राफी और सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय में टाप करने वाली एमडी एमएस की छात्रा डाॅ. स्तुति छाछरिया और एमबीबीएस में सर्वाधिक नंबर हासिल करने वाले छात्र डाॅ. स्पर्श सूरी ने भी श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल के साथ 51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्राप्त किया।

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कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के शतिक प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में सभी 388 विद्यार्थियों को डिग्रियां अध्यक्षता करते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय, मुख्य अतिथि मेडिकल एजुकेशन एब्राड के टेक्निकल एडवाइजर, अति विशिष्ट सेवा मेडल एवं विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डाॅ. पवन कपूर और ट्रस्ट के संस्थापक देव मूर्ति ने प्रदान की।

डाॅ. राय ने विद्यार्थियों को दीक्षा के साथ एनएमसी की भी शपथ दिलाई। संस्थापक देव मूर्ति ने कहा कि आज का दिन डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए यादगार दिन है।

मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डाॅ. एमएस बुटोला ने ट्रस्ट की उपलब्धियों व योजनाओं की जानकारी दी। वाइस प्रिंसिपल डाॅ. रोहित शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डाॅ. आयुषि शुक्ला और डाॅ. शिवांगी मिधा ने किया।

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बरेली कालेज की प्रभारी प्राचार्य प्रो. वंदना शर्मा, प्रो. एमबी कलहंस, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा, एसआरएमएस के सेक्रेटरी आदित्य मूर्ति, ट्रस्टी आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, देविशा मूर्ति, पुष्पा गुप्ता आदि सदस्य मौजूद रहे।

इलाज सही न होने पर मरीज को दोषी न ठहराएं

मुख्य अतिथि एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डाॅ. पवन कपूर ने कहा कि अभी खुद के लिए, परिवार के लिए और सबसे बढ़ कर देश के लिए कुछ करना बाकी है। स्वास्थ्य पेशे में आप कभी आराम से नहीं रहेंगे।

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लगातार चुनौतियां सामने आएंगी, जिनके लिए अपना कंफर्ट छोड़ना ही पड़ेगा। लेकिन सिर्फ यही आपको महान चिकित्सक नहीं बनाएगा। मरीज के प्रति आपका व्यवहार, एम्पैथी और सिम्पैथी आपको अच्छा चिकित्सक बनने की ओर ले जाएगी।

70 प्रतिशत से ज्यादा बीमारियां सिर्फ मरीज की पूरी बात गंभीरता से सुनने से ही ठीक हो जाती हैं। ऐसे में मरीज को समय दें, उसकी बात सुनें। अपना समझ कर उसका इलाज करें। इलाज सही न होने के लिए कभी भी मरीज को दोषी न ठहराएं। खुद जिम्मेदारी लें।

एआई के दौर में महान चिकित्सकों की जरूरत

कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि चुनौतियों भरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के दौर में अब देश को सिर्फ चिकित्सकों की नहीं, महान चिकित्सकों की जरूरत है। जो मरीज की भावना को समझ कर, संवेदनशील होकर उनका उपचार कर सकें।

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आज डिग्री मिलने के बाद समाज आपको इसका उत्तरदायित्व दे रहा है। अच्छा चिकित्सक सिर्फ बीमारी की पहचान कर इलाज करता है, जबकि महान चिकित्सक रोगी की पीड़ा और दर्द को महसूस कर उसका उपचार करता है।

दोनों में अंतर है। इलाज करना चिकित्सक का नियमित काम है। वह सैकड़ों मरीज रोज देखता है। लेकिन मरीज कभी कभी ही इलाज के लिए पहुंचता है।

ऐसे में उसकी भावनाओं को समझ कर ही इलाज करना जरूरी है। तभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान आती है। संवेदनाओं के साथ किया गया इलाज ही चिकित्सक को भगवान की श्रेणी में रखा है।

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