बरेली, जेएनएन : महाभारत कालीन इतिहास को समेटे आंवला के रामनगर में शिव-पार्वती की बेशकीमती पौराणिक प्रतिमा बेच दी गई। मीलों में फैले रामनगर किला के खंडहर की मिट्टी बारिश में दरकी तो प्रतिमा बाहर निकल आई। किसान ने इसे देख लिया, प्रतिमा निकालकर व्यापारी के पास ले गया और चंद रुपयों में बेच दी। पूरे रामनगर क्षेत्र में इसकी चर्चा होती रही मगर जिस पुरातत्व विभाग के पास इस क्षेत्र के संरक्षण की जिम्मेदारी है, उसने कोई सुध नहीं ली।

रामनगर किला क्षेत्र ऐतिहासिकता को समेटे हुए है। क्षेत्र के महाभारत कालीन होने और पांडवों की मौजूदगी होने के प्रमाण यहां मिल चुके हैं। जिसके बाद से इसे पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले लिया था। देखरेख के लिए चौकीदार रखा गया मगर, उसका ऐतिहासिक धरोहरों को बचाया नहीं जा रहा। दो दिन पहले रामनगर के खंडहर के पास से ग्राम नसरतगंज निवासी किसान गुजर रहा था। किला से होकर खेत में जाते वक्त उसे खंडहर की दरकी हुई मिट्टी के बीच शिव-पार्वती की काफी पुरानी प्रतिमा दिखी। ग्रामीणों के अनुसार, उसने प्रतिमा उठाई और साथ ले गया।

किले में लगा पंपिंग सेट जिससे होती है सिंचाई। जागरण

सात हजार में सौदा कर कह दिया, किसी को बताना नहीं 

प्रतिमा लेकर वह रामनगर के एक व्यापारी के पास पहुंचा। चूंकि प्रतिमा सालों पुरानी और बेशकीमती थी इसलिए व्यापारी ने हाथों-हाथ उसका सौदा कर लिया। सात हजार रुपये देकर कहा कि किसी को बताना नहीं। जो मिल रहा है, वह ले लो। वहीं, इस घटना के बाद से लोगों में अतीत के बेशकीमती अवशेषों के नष्ट होते जाने की भी चर्चा है।

पहले भी मिल चुकी हैं मूर्तियां

क्षेत्र के किसान व चरवाहे किले के खंडहरों में अपने पशु चराते रहते हैं। बरसात के दिनों में मिट्टी बहने के कारण अक्सर ही चरवाहों को मूर्तियां, प्राचीन कालीन सिक्के, नगीने, पत्थर आदि मिलते रहते हैं। जानकार यहां आकर उन्हें खरीदकर ले जाते हैं।

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पांच दिन पूर्व ही बिका था सिक्का

पांच दिन पहले ही एक चरवाहे को मिला चांदी का प्राचीन सिक्का भी बेचा गया था । बताया जाता है कि ग्राम नसरतगंज में रहने वाला युवक खंडहरों में बकरी चरा रहा था। इसी दौरान उसे एक टीले पर चांदी का प्राचीन सिक्का मिला था। बाद में उसने उसे भी बेच दिया।


रामनगर स्थित महाभारत कालीन अहिच्छत्र किला। जागरण 

नष्ट हो रहा इतिहास 

पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते पांडव काल की यह निशानी अब धीरे धीरे नष्ट होती जा रही है। लोगों ने कब्जा कर लिया है और इस पौराणिक जमीन पर खेती करना शुरु कर दिया है।

रामनगर में पौराणिक वस्तुएं, प्रतिमाएं बड़ी संख्या में पहले भी मिलती रही हैं। 12 वीं शताब्दी में रामनगर क्षेत्र में शहर था जोकि धीरे-धीरे खत्म होता चला गया। -प्रो. श्याम बिहारी लाल, प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग, रुहेलखंड विवि

प्रतिमा मिलने व उसके बेचे जाने की जानकारी नहीं मिली है। इस बारे में जानकारी ली जा रही रही है। -संजय गर्ग, एसओ, रामनगर

Posted By: Abhishek Pandey