सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट लाइफ' दिखाने की होड़ बना रही डिप्रेशन का शिकार, युवाओं पर हावी हो रहा 'एस्केपिंग फिनोमिना'
इंटरनेट मीडिया पर 'परफेक्ट लाइफ' दिखाने की होड़ और दूसरों से तुलना करने की बढ़ती प्रवृत्ति जेन-जेड युवाओं में मानसिक ...और पढ़ें

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HighLights
काउंसिलिंग में दिख रही मुख्य वजह एस्केपिंग फिनोमिना, किया जा रहा सुधार
जागरण संवाददाता, बरेली। जेन-जी में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर अपने भविष्य के सपनों, पढ़ाई और करियर की तैयारियों की छोटी-छोटी अपडेट साझा करने का चलन बढ़ रहा है। सफलता मिलने पर जहां उनका उत्साह दोगुणा हो जाता है, वहीं लक्ष्य हासिल न होने पर इंटरनेट मीडिया पर बनाई गई छवि को बनाए रखने का दबाव मानसिक परेशानी का कारण तक बनने लगा है।
आभासी दुनिया अधिक हावी हो रही है। जिला अस्पताल के मनकक्ष में ऐसे युवा पहुंच रहे हैं, जिन्हें काउंसिलिंग और जरूरत के अनुसार दवाओं के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है।
मनोचिकित्सक डाॅ. आशीष कुमार बताते हैं कि उनके पास बीते तीन माह में इस तरह के छह मामले आ चुके हैं। इस तरह के युवाओं में एस्केपिंग फिनोमिना देखने को मिलता है।
यानी व्यक्ति अपने वास्तविक जीवन की परेशानी, जिम्मेदारी या तनाव से बचने के लिए किसी काल्पनिक दुनिया या अन्य गतिविधियों का सहारा लेता है।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर लगातार अपनी उपलब्धियां प्रदर्शित करने से कई युवाओं में स्वयं की तुलना दूसरों से करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। परीक्षा, प्रतियोगी तैयारी या करियर में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर उन्हें यह चिंता सताने लगती है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे।
इसके चलते पढ़ाई प्रभावित होने के साथ नींद, एकाग्रता और आत्मविश्वास पर भी असर पड़ सकता है। सफलता का पैमाना लाइक्स, कमेंट या फाॅलोअर्स के बजाय वास्तविक उपलब्धियों को बनाना चाहिए।
असफलता को छिपाने के बजाय उससे सीखें। लगातार तनाव, नींद में बदलाव, पढ़ाई में मन न लगना या सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसी स्थिति बनी रहे तो परिवार को विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
कनाडा जाने का सपना, अंग्रेजी परीक्षा में असफलता
मझोला निवासी 21 वर्षीय युवक कनाडा जाने की तैयारी कर रहा था। वह इंटरनेट पर लगातार तैयारी और भविष्य से जुड़ी अपडेट साझा करता था। अंग्रेजी की परीक्षा में असफल होने के बाद उसे चिंता सताने लगी कि इंटरनेट पर उसके जानने वाले उसके बारे में क्या सोचेंगे।
धीरे-धीरे वह तनाव में रहने लगा और पढ़ाई पर भी असर पड़ा। मनकक्ष में उसकी काउंसलिंग की गई और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उपचार दिया गया।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और तुलना का दबाव
भोजीपुरा निवासी 22 वर्षीय युवती प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इंटरनेट पर पढ़ाई से जुड़ी तस्वीरें और लक्ष्य साझा करती थी। जब उसके साथ तैयारी करने वाले कुछ युवाओं का चयन हो गया।
उसका नहीं हुआ तो वह लगातार खुद की तुलना करने लगी। आत्मविश्वास कम हुआ और पढ़ाई में मन लगना कम हो गया।मन कक्ष में स्वजन के माध्यम से मार्गदर्शन लिया।
नौकरी की तैयारी में ‘सक्सेस अपडेट’ बनी परेशानी
जगतपुर निवासी 24 वर्षीय युवक नौकरी की तैयारी कर रहा था। उसने इंटरनेट पर जल्द नौकरी मिलने की बात साझा कर दी। कई महीनों तक सफलता नहीं मिली तो परिचितों के सवालों से बचने के लिए उसने इंटरनेट पर सक्रियता बढ़ा दी। प्रोफाइल और पोस्ट को बेहतर दिखाने में अधिक समय देने लगा। लगातार तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ने पर परिवार उसे मनकक्ष लेकर पहुंचा।
रील और लाइक्स से आत्मविश्वास जोड़ने लगी छात्रा
शहर के एक कालेज की 20 वर्षीय छात्रा इंटरनेट मीडिया पर रील और तस्वीरें पोस्ट करती थी। पोस्ट पर पहले अच्छी प्रतिक्रिया मिलने से उसका आत्मविश्वास बढ़ा, लेकिन बाद में लाइक्स और कमेंट कम होने लगे।
अपनी लोकप्रियता को लेकर चिंता करना शुरू कर दिया। बार-बार फोन को चेक करना। पढ़ाई और नींद प्रभावित होने पर उसकी काउंसिलिंग की गई।
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