बरेली, जेएनएन। Small injury took form Rare Disease Osteogenic Sarcoma : एक छोटी सी दुर्घटना जिंदगी भर के लिए नासूर बन गई। साइकिल चलाने के दौरान गिरने पर पैर में लगी चोट ने कैंसर का रूप ले लिया। संक्रमण इस कदर फैल गया कि किशोरी का बायां पैर काटना पड़ा। टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई में किशोरी का इलाज चल रहा है। इलाज में परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। ऐसे में संकट की इस घड़ी में चाहत के परिवार को आपकी मदद की दरकार है।

फरीदपुर के शिवराजपुर की रहने वाली किशाोरी चाहत के पिता नीलेश कुमार मिश्र एक सिक्योरिटी कंपनी में सुपरवाइजर हैं। वह रुड़की में तैनात हैं। साल 2019 के जनवरी माह में साइकिल चलाने के दौरान गिर पड़ीं। इससे उनके बायें पैर के घुटने में चोट आ गई। पिता नीलेश कुमार मिश्र ने काफी इलाज कराया लेकिन, कोई आराम नहीं हुआ। सालभर बीतने के बाद भी जब कोई आराम न हुआ तो उन्होंने रुड़की में एक दवा कंपनी में शोध एवं अनुसंधान विभाग के डॉ. संजय अग्रवाल से बेटी की तकलीफ के बारे में बताया। डॉ. संजय मदद को आगे आए।

फोर्टिस अस्पताल दिल्ली में वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ पत्नी डॉ. साधना अग्रवाल को संजय ने जानकारी दी। जांच शुरू हुई तो पता चला कि चाहत ऑस्टियोजेनिक सर्कोमा नामक हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं के कैंसर की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। रोग का प्रभाव उसके बायें पैर पर ही है। फ़ोर्टिस अस्पताल से चाहत को टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई में रिफर किया गया। इलाज के दौरान यहां उसका बायां पैर काटना पड़ा। प्रतिमाह 15 हजार कमाने वाले किशाेरी के पिता के बेटी के इलाज में पूरी जमा-पूंजी खर्च हो चुकी है। बेटी की बीमारी के बाद से वह ड्यूटी भी नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसे समय में चाहत के परिवार को आपकी मदद की जरूरत है। डाक्टरों के मुताबिक, अभी किशोरी को कम से कम जनवरी तक भर्ती रखना पड़ेगा। चाहत की मदद के लिए उनके पिता नीलेश कुमार मिश्र 9794197245 के फोन नंबर पर बात कर सकते हैं। चाहत ऑस्टियोजेनिक सर्कोमा नामक हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं के जिस कैंसर की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। डॉ. साधना के मुताबिक, एक से डेढ़ लाख लोगों के बीच में ऐसा एक केस सामने आता है। इसमें हड्डियों की कोशिकाएं पूरी तरह कमजोर हो जाती हैं।

Edited By: Samanvay Pandey