बरेली [प्रसून शुक्ल] : चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण टलने के बाद भी अभी इसके अपने मुकाम की तरफ बढ़ने की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिका, रुस और चीन के बाद भारत ऐसा चौथा देश है जो अपना यान चांद पर उतारेगा। चंद्रयान-2 के पूरे मिशन की कामयाबी में रुहेलखंड के 'बाहुबली' यानी सतपाल अरोरा उर्फ मिक्कू भी हमसाया बनेंगे। 

सतपाल अरोरा मूल रूप से बदायूं के उझानी के रहने वाले हैं। वे इन दिनों इसरो में सीनियर साइंटिस्ट पद पर तैनात हैं और चंद्रयान-2 में खास हिस्सा है। उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है वह पूरी प्रक्रिया में 'पिन प्वाइंट' मानी जा रही है। सेंसर सपोर्ट सिस्टम के तौर पर रॉकेट के तापमान का आंकलन करना और उसके बदलाव पर नजर रखकर यान को उसकी कक्षा में स्थापित कराने का अहम मोड़ मिक्कू की देखरेख में एक खास टीम को करना है।

प्रेशर सिस्टम से लेकर तापमान के बदलाव की पूरी प्रक्रिया चंद्रयान-2 की कामयाबी की धुरी मानी जा रही है। काउंटडाउन की बीस घंटे की अवधि के दौरान रॉकेट और यान के पूरे सिस्टम को तमाम जांच प्रक्रिया के अंतर्गत गुजरना है। बता दें कि इसरो का सबसे भारी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क 3 यानी जीएसएलवी एमके3 यान को लेकर रवाना होना था, करीब 640 टन वजनी इस रॉकेट को तेलुगु मीडिया ने बाहुबली का नाम दिया है।

मंगलयान मिशन पर असेंबली इंचार्ज की भूमिका निभा चुके मिक्कू बताते हैं कि चांद के नार्थ पोल पर तो लगातार ही एनालिसिस होता रहा है, पर साउथ पोल की तरफ अब तक दुनिया के किसी देश ने रुख नहीं किया। भारत साउथ पोल पर अहम प्रोजेक्ट के जरिए मिलने वाले नतीजों से दुनिया को चौकाएगा। इससे पहले सतपाल देश के अहम प्रोजेक्ट रहे सेटेलाइट पीएसएलवी या मार्स सेटेलाइट सिस्टम जैसी अहम महत्वाकांक्षी योजनाओं में निरंतर सक्रिय रहे चुके हैं।

मिक्कू को मिला यह जिम्मा

चंद्रयान-2 अपनी कक्षा में स्थापित होने से पूर्व 130 डिग्री सेल्सियस से लेकर -180 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान के क्रम से गुजरेगा। इस उच्च और निम्न दाब पर यान का पूरा फंक्शन काम करता रहेगा इसके जिम्मा सतपाल अरोरा और उनके निर्देशन में काम करने वाली टीम पर होगा।

चंद्रयान-2 का मकसद है कि चांद पर संभावनाएं तलाशें। क्या वहां कुछ तरल है या आइस है, या फिर वहां के बारे में निरंतर हो रहे बदलाव की गणना और आंकलन हमारा लक्ष्य हैं ताकि हम उनका विश्लेषण कर सकें।

-सतपाल अरोरा उर्फ मिक्कू, सीनियर साइंटिस्ट, इसरो 

Posted By: Abhishek Pandey

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