जेएनएन, बरेली : इंटरनेट, सोशल मीडिया, वेबसाइटों की दुनिया पढ़ाई-लिखाई की उम्र में किशोर से लेकर युवाओं को किताबों के संसार से दूर ले गई है। एक अध्ययन की रिपोर्ट में सामने आया सच है कि 80 प्रतिशत छात्रों में पुस्तक पढ़ने में रुचि ही नहीं रही। इसी कारण उनमें शोध करने, विचार करने, तर्क की क्षमता भी क्षीण हो रही है। यह अध्ययन बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हेमा खन्ना ने किया है।

यह अध्ययन देशभर के अलग-अलग राज्यों-शहरों में 12 हजार से अधिक छात्रों पर किया गया है। सेमिनार, कांफ्रेंस और कार्यशालाओं के जरिए बच्चों की पुस्तकों में दिलचस्पी टटोली। चौंकाने वाली सच्चाई मिली कि करीब दस हजार छात्रों में पुस्तकों के प्रति दिलचस्पी शून्य है। जो ज्ञान, जानकारी पहले पुस्तक पढ़कर समझते थे, उसे अब इंटरनेट पर मालूम करते हैं। मनोवैज्ञानिक तौर पर इससे बच्चे कमजोर हो रहे हैं।

फीसद लोग (10 से 28 वर्ष आयु के) पूरी तरह इंटरनेट पर आश्रित

प्रतिशत छात्रों में नहीं रह गई किताबें पढ़ने की दिलचस्पी

फीसद छात्रों को अब पाठ्य पुस्तकें भी लगने लगी बोङिाल

ऐसे दूर कर सकते हैं समस्या 

डॉ. हेमा खन्ना के मुताबिक इस बड़ी समस्या की चाबी शिक्षकों और अभिभावकों के पास है। कक्षा में अलग-अलग एक्टिविटी के माध्यम से छात्र-छात्रओं में पुस्तक पढ़ने के लिए रुचि जगानी होगी। उन्हें लिखने के लिए टास्क देना होगा। अलग-अलग विषयवस्तु के फोटो देकर उन्हें उस पर कहानी लिखने के लिए प्रेरित करें। टिकी पहेलियों को हल करने का काम बच्चों को दें। छोटे बच्चों को कॉमिक्स, कहानियां पढ़कर सुनाने से भी वह खुद पढ़ने को प्रेरित होंगे।

प्रमुख कारण जो सामने आए

मनोवैज्ञानिक बताती हैं कि इसका प्रमुख कारण बच्चों में कंफर्ट जोन की अधिकता है।

बचपन में ही अभिभावक वह चीजें दे रहे जो बच्चों को कंफर्ट जोन में पहुंचाने में मदद करती है।

इससे बच्चे मेहनत करने की बजाय शार्ट कट अपनाते हैं।

बड़ा कारण एंड्रॉयड मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप घर पर मुहैया होना

इंटरनेट व सोशल प्लेटफॉर्म से बाहर पढ़ने, जानने की दुनिया हो रही सीमित

Posted By: Abhishek Pandey

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