जेएनएन, बरेली : त्रिवेणी एक्सप्रेस के संचालन को लेकर सोमवार को रेलवे अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई। पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेन को टनकपुर स्टेशन से रवाना कर दिया। जब ट्रेन बरेली पहुंची और तो पता चला कि उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल ने बोर्ड के आदेश पर ट्रेन रद थी। संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर त्रिवेणी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे तक बरेली सिटी स्टेशन पर ही खड़ी रही। इस दौरान यात्रियों ने जमकर हंगामा किया। बाद में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। 

दरअसल, लखनऊ-रायबरेली मार्ग के पांच स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक दोहरीकरण के चलते रेलवे बोर्ड ने त्रिवेणी एक्सप्रेस रद करने के आदेश दिए थे। मगर पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेन को टनकपुर स्टेशन से तय समय से करीब ढाई घंटा देरी से रवाना कर दिया। ट्रेन पीलीभीत स्टेशन, इज्जतनगर स्टेशन होते हुए बरेली सिटी स्टेशन तक पहुंच गई। वहां से उत्तर रेलवे में आने वाले बरेली जंक्शन से सिग्नल मांगा गया तो ट्रेन को आगे बढ़ाने का सिग्नल ही नहीं मिला। क्योंकि बरेली जंक्शन पर मुरादाबाद मंडल की ओर से आए आदेश के मुताबिक सोमवार को त्रिवेणी एक्सप्रेस (14370) रद थी। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल और उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल के बीच ट्रेन संचालन को लेकर गफलत होने पर त्रिवेणी एक्सप्रेस बरेली सिटी स्टेशन पर करीब सवा दो घंटे तक खड़ी रही। इस दौरान यात्री परेशान होते रहे। बाद में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर त्रिवेणी एक्सप्रेस को आगे रवाना किया गया। 

मुसाफिरों ने किया हंगामा

पूर्वोत्तर रेलवे, इज्जतनगर मंडल के अधीन त्रिवेणी एक्सप्रेस टनकपुर स्टेशन से करीब ढाई घंटा देरी से सुबह 10.15 बजे चली थी। बरेली सिटी पर ट्रेन दोपहर 01.10 बजे पहुंची। यहां त्रिवेणी का पांच मिनट ठहराव है लेकिन यहां ट्रेन 2.25 घंटा तक खड़ी रही। इस पर मुसाफिरों ने जमकर हंगामा काटा। 

जागरण ने चेताया फिर भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान

पूरे मामले में रेलवे अधिकारियों ने दोहरी लापरवाही की। रेलवे बोर्ड से तय हो चुके आदेशों को नजरअंदाज कर दिया। रेलवे बोर्ड ने लखनऊ-रायबरेली मार्ग के पांच स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक दोहरीकरण के चलते त्रिवेणी एक्सप्रेस रद करने के आदेश दिए थे। मगर पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम (परिचालन) ने ट्रेन को ढाई घंटे देरी से रवानगी दी। जबकि जागरण ने ट्रेन संचालन को लेकर असमंजस होने पर चेताया था, मगर अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया। अधिकारी अगर सुबह ही इस पर ध्यान देते तो यह नौबत न आती। 

Posted By: Abhishek Pandey