जागरण संवाददाता, बरेली : मतदान से रोकने पर आत्मदाह करने वाले हरि सिंह की मौत के मामले में दोषी ठहराए जाने और एक लाख रुपये जुर्माना भरने के आदेश पर पूरे पुलिस महकमे की नींद टूट गई। लगभग साढ़े चार साल से घटना के वक्त बूथ पर कार्यरत बीएलओ के इर्द-गिर्द ही छानबीन करने वाली जिला पुलिस ने हरि सिंह के परिवार की सुध ही नहीं ली थी। मुख्यालय के फरमान के बाद उसके निकटस्थ परिजन को तलाश रही है। एसएसपी ने डीएम से भी तत्काल अधिकृत व निकटस्थ परिजन का नाम, प्रमाणिकता की जानकारी मांगी है।

2014 के लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन देवचरा मतदान केंद्र पर हरि सिंह को मतदान से रोका गया था। तीन बार लौटाने से क्षुब्ध होकर उसने दामोदर स्वरूप विद्यालय में बने मतदान केंद्र के बाहर ही मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह कर लिया था।

पीएचक्यू के फरमान पर मची खलबली

पुलिस मुख्यालय से फरमान आते ही जिला पुलिस में खलबली मच गई। बुधवार को ही पुलिस लाइन स्थित चुनाव कार्यालय से इस पूरे प्रकरण की फाइल पर एसएसपी ने जानकारी तलब की। आयोग ने 10 दिन में हरि सिंह के परिजन को आर्थिक सहायता भुगतान कर इसकी रसीद मांगी है।

इसी साल के वित्तीय वर्ष खर्च में डाली जाएगी रकम

मुआवजे के लिए मुख्यालय से 2018-19 के वित्तीय वर्ष के आय-व्ययक खाते से रकम जारी हुई है। दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों की तनख्वाह से इस वित्तीय वर्ष के मानवाधिकार हनन के प्रकरणों से संबंधित आर्थिक सहायता कोष में रकम डाली जानी है। हरि सिंह मौत मामला

-मुआवजा के लिए एसएसपी ने डीएम से अधिकृत निकटस्थ परिजन का मांगा नाम

-आयोग ने 10 दिन में परिजन को आर्थिक सहायता भुगतान कर मांगी रसीद

Posted By: Jagran

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