जेएनएन, बरेली: कमलेश तिवारी हत्याकांड में आरोपितों की मदद करने वालों को अब लखनऊ की पुलिस तलाश करेगी। बरेली में ऐसे चार लोगों पर निगाह है, जिनका सुराग लगाया जा रहा। अभी तक इस पूरे प्रकरण को एटीएस व एसटीएफ देख रही थी। पूरे मामले से जुड़े सभी प्रमुख आरोपितों को जेल भेजने के बाद प्रकरण पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।

18 अक्टूबर को लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमेलश तिवारी की हत्या के बाद दोनों आरोपित अशफाक व मोइनुद्दीन बरेली आ गए थे। यहां नावेद व कैफी ने दोनों के रुकने, इलाज आदि का इंतजाम किया था। जानकारी होने के बाद एटीएस व एसटीएफ ने यहां दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में पता चला कि इन दोनों के अलावा चार अन्य लोग भी हैं जिन्होंने हत्यारोपितों की मदद की थी। इनमें एक शख्स टैवल्स एजेंसी संचालक है, दूसरा एक होटल मालिक और बाकी दो युवकों ने आर्थिक मदद की थी। उन्होंने ही रुपयों का इंतजाम किया जिसके बाद आरोपित नेपाल भागे थे। हालांकि वहां से वापस लौटे और गुजरात में गिरफ्तार कर लिए गए थे।

आर्थिक मदद करने वालों के पास कहां से आ रही रकम

द सरी ओर खुफिया टीमों को सक्रिय किया गया है। पता किया जा रहा कि आर्थिक मदद करने वाले युवकों की आय का जरिया क्या है। वे कहां से और किन संसाधनों से रुपये कमा रहे और हत्याकांड के आरोपितों को रकम देने के पीछे मंशा क्या थी। माना जा रहा कि कुछ और लोग भी इस पूरे प्रकरण से जुड़े हो सकते हैं।

एटीएस के एडीजी बोले- कुछ और नाम आए सामने

एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर ने बताया कि आरोपित, प्रमुख साजिशकर्ता व मददगार जेल जा चुके हैं। कुछ और लोगों के नाम भी सामने आए हैं, उन पर अब लखनऊ पुलिस काम करेगी।

Posted By: Abhishek Pandey

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