बरेली, जेएनएन। Nekpur Sugar Mill : नेकपुर चीनी मिल एक वक्त पर शहर के सबसे चर्चित कारोबारी साहू राम नारायण चमन कोठी वाले चलाते थे। वर्ष 1932 से उन्होंने कारोबार की बागडोर संभाली। फिर गन्ना किसानों के सिर्फ नौ लाख रुपये की लंबित देनदारियों की वजह से चीनी मिल अधिग्रहित हुई थी। उस वक्त कोर्ट से रिसीवर बैठाया गया था। बाद में फैक्ट्री बंद हो गई। तकरीबन 650 कर्मचारियों का रोजगार छीन गया था। 26 लाख रुपये का पीएफ और ग्रेजुएटी का बकाया था। ब्याज समेत अब ये रकम दो करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

जिसके लिए कर्मचारियों का केस लखनऊ की सिंगल बेंच में चल रहा है। वर्ष 2007 में बसपा सरकार बनने के बाद जिन 21 बंद पड़ी चीनी मिलों को बंद करने का फैसला किया गया था। उसमें बरेली की नेकपुर चीनी मिल भी शामिल थी। उस वक्त बिजनौर की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नीलामी में 33 एकड़ जमीन, मशीनें, स्क्रैप और इमारत खरीदी थी। आज भी परिसर में रहने वाले कर्मचारियों का कहना है कि फर्जी कंपनी के हाथों में जाते ही मशीनें, स्क्रैप समेत सामान शिफ्ट कराया गया था।

यह है पूरा मामला

लखनऊ से आए प्रवर्तन अधिकारी अजय गुप्ता और मदन मोहन तिवारी ने एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह से मुलाकात की। प्रर्वतन निदेशालय से जारी जब्तीकरण के दस्तावेज उन्हें सौंप दिए। इसके बाद सदर तहसीलदार गौतम सिंह ने एक टीम को प्रवर्तन अधिकारियों के साथ नेकपुर चीनी मिल भेजा। यहां कागजी कार्रवाई के बाद गेट पर अफसरों ने अपने ताले डालकर सील लगा दी।

इस मामले के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। हमने भुगतान के लिए पीएफ कमिश्नर से पैरवी की थी। कार्रवाई करते हुए मिल को सील करवा दिया गया था। लखनऊ बेंच में आज भी मुकदमा चल रहा है। - सतीश मेहता, राष्ट्रीय महासचिव, इंडियन नेशनल सुगर मिल्स वर्कर फेडरेशन

ईडी के प्रवर्तन अधिकारियों ने नेकपुर चीनी मिल पर कब्जा लेने के लिए हमसें मदद मांगी थी। हमनें एसडीएम सदर के जरिये उन्हें कब्जा दिलाया। - नितीश कुमार, डीएम बरेली

Edited By: Ravi Mishra