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नवाबगंज विधानसभा सीट पर बढ़ गईं सियासी सरगर्मियां, विरोध के बावजूद डॉ. मीनाक्षी को मिली कुर्सी

Published: Tue, 20 Oct 2026 08:57 PM (IST)

बरेली की नवाबगंज विधानसभा सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

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HighLights

  1. डॉ. मीनाक्षी गंगवार बनीं भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष।

  2. स्थानीय विरोध के बावजूद मिली कुर्सी, सियासी हलचल तेज।

  3. पति डॉ. आशुतोष गंगवार के चुनाव लड़ने की चर्चा।

अशोक आर्य, बरेली। जिले की विधानसभा सीट नवाबगंज का चुनाव खासा दिलचस्प होता रहा है। आगामी चुनाव भी इसी तर्ज पर होने का अनुमान है। नवाबगंज में रहने वाली डॉ. मीनाक्षी गंगवार को भारतीय जनता पार्टी ने महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया है। चर्चा है कि स्थानीय नेताओं के विरोध के बावजूद उन्हें यह पद दिया गया।

पिछले चुनाव में विधायक प्रत्याशी डॉ. एमपी आर्य के लिए डमी प्रत्याशी के रूप में सामने आईं डॉ. मीनाक्षी इस बार अपने पति डॉ. आशुतोष गंगवार को चुनाव लड़ाने खड़ीं हैं। इससे नवाबगंज में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। अन्य दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं।

कुर्मी समाज ही यहां निर्णायक

नवाबगंज विधानसभा सीट पर सवा लाख से अधिक कुर्मी मतदाता है। हर चुनाव में कुर्मी समाज ही यहां निर्णायक की भूमिका में रहता है। वर्ष 2022 के चुनाव में पार्टी ने यहां डॉ. एमपी आर्य को टिकट दिया, जिन्हें लोगों ने जिताकर विधानसभा तक पहुंचाया। अब फिर चुनाव करीब हैं। मौजूदा विधायक होने के चलते पार्टी उन पर फिर एक बार दांव लगा सकती हैं, जिस पर यहां के लोग कई तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

वहीं, सीट से कई लोग चुनाव लड़ने की इच्छा पार्टी नेताओं के सामने जाहिर कर चुके हैं। इनमें माया अस्पताल के संचालक डॉ. आशुतोष गंगवार, पूर्व विधायक के पुत्र विशाल गंगवार, भुजेंद्र गंगवार, रमेश गंगवार समेत अन्य शामिल हैं। इधर, भाजपा की जिला मंत्री डॉ. मीनाक्षी गंगवार को महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाने जाने की घोषणा रविवार को हुई।

बताते हैं कि स्थानीय नेताओं के विरोध के चलते करीब छह दिन उनके नाम की घोषणा रुकी रही। महानगर और आंवला जिलाध्यक्ष की घोषणा छह दिन पहले कर दी गई थी। डॉ. मीनाक्षी की देवरानी प्रज्ञा गंगवार नवाबगंज की ब्लाक प्रमुख हैं। पार्टी में उनका कद बढ़ाए जाने के बाद टिकट की आस लगाए कार्यकर्ताओं में उथल-पुथल मच गई है। सभी ने सक्रियता बढ़ा दी है। विधानसभा चुनाव में किसकी गोट सटीक बैठेगी, इस पर चर्चा होने लगी है।

सजातीय बड़े नेता का भी रहेगा असर

नवाबगंज की राजनीति में शुरू से ही एक सजातीय बड़े नेता का भी प्रभाव रहता है। पिछले कई चुनावों में उनकी सिफारिश से ही यहां के टिकट हुए। कुछ समय पहले तक यह चर्चा थी कि सजातीय बड़े नेता के परिवार से कोई इस सीट पर दावा ठोक सकता है, लेकिन उन्हें दूसरी जिम्मेदारी मिलने के बाद वह संभावना खत्म हो गई है। बावजूद इसके उनका प्रभाव आने वाले चुनाव में भी इस सीट पर माना जा रहा है।

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