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MJPRU के नए कुलपति के लिए छिड़ी 'जंग': बरेली से लेकर लखनऊ तक दिग्गज प्रोफेसरों ने लगाई दौड़!

Published: Mon, 23 Mar 2026 05:01 PM (IST)

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नए कुलपति की तलाश तेज हो गई है। वर्तमान कुलपति प्रो. केपी सिंह का ...और पढ़ें

रुहेलखंड विश्वविद्यालय

रुहेलखंड विश्वविद्यालय

HighLights

  1. अगस्त 2026 तक है वर्तमान कुलपति प्रो. केपी सिंह का कार्यकाल

  2. जनभवन ने जारी किया विज्ञापन, 13 अप्रैल तक होंगे आवेदन

जागरण संवाददाता, बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। वर्तमान कुलपति प्रो. केपी सिंह का कार्यकाल इस वर्ष अगस्त में समाप्त होने जा रहा है। वहीं, जनभवन (पूर्व में राजभवन) ने नए 'कुलपति' के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया है, जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि 13 अप्रैल निर्धारित की गई है।

इस खबर ने शिक्षा जगत के दिग्गजों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। शहर के वरिष्ठ प्रोफेसरों से लेकर बाहरी दिग्गजों तक, हर कोई अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी में है। चर्चा है कि कई पहुंच वाले शिक्षकों ने तो लखनऊ के चक्कर काटने भी शुरू कर दिए हैं।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय में प्रो. केपी सिंह ने 17 अगस्त 2020 को कार्यभार संभाला था और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) को सबसे पहले लागू कर विश्वविद्यालय को प्रदेश में अग्रणी पंक्ति में खड़ा कर दिया। उन्होंने अटल एआइ सेंटर और आरआइएफ की स्थापना कराई, नैक ए डबल प्लस ग्रेड दिलाया।

14 कालेजों जोड़े और दर्जनों अंतरराष्ट्रीय एमओयू कराए। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय का भूगोल काफी बदल गया। मुरादाबाद और शाहजहांपुर में नए विश्वविद्यालय बनने से रुविवि का कुनबा 598 कालेजों से घटकर महज 182 पर सिमट गया है। सत्र 2026-27 से शाहजहांपुर के कालेज पूरी तरह अलग हो जाएंगे, जिससे विश्वविद्यालय की आय पर भी असर पड़ने की संभावना है।

हैट्रिक की उम्मीद और विदाई को लेकर बढ़ी चर्चा

प्रो. केपी सिंह को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एक बार नियुक्ति और दूसरी बार सेवा विस्तार देकर अपना भरोसा जताया था। लेकिन इस बार शिक्षा जगत के जानकार 'तीसरी पारी' की संभावना कम जता रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि राजभवन इस बार किसी नए चेहरे को रुवि की कमान सौंप सकता है।

ऐसे में चर्चाएं तेज हैं कि रुवि को फिर से वही पुराना विस्तार मिलेगा या नए कुलपति के सामने घटती आय और सिमटते दायरे को संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगी। नजरें अब 13 अप्रैल और जनभवन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


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