बरेली, जेएनएन। कोविड का असर कुछ कम होते ही पगडंडी के रास्ते गांवों में तहसील पहुंचने लगी। गांव के लोगों को राहत मिली, क्योंकि सालों नासूर बन चुकी समस्या खत्म करने की राहें खुली। कही तालाब के कब्जे हटे, कही शौचालय की दबी हुई रकम ग्रामीणों के खातों तक पहुंचाई गई।

इस कवायद के लिए अधिकारियों ने होमवर्क भी पूरा किया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर पहुंचने वाली ऑनलाइन शिकायतों को मैपिंग करवाई गई। सामने आया कही राशन कार्ड नहीं बनाने की दिक्कत अधिक है, कही शौचालय तो कही सड़क-तालाब की समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। फरियाद तहसील तक आए, इसका इंतजार उनके मर्ज को और बढ़ा रहा था। इसलिए तहसीलदार सदर ने गांव में पहुंचकर लोगों के साथ बैठने की योजना बनाई। अभिनव प्रयोग में तहसीलदार सदर का प्रयास है कि हफ्ते के तीन दिन वह खुद, सदर तहसीलदार और स्टाफ किसी एक गांव में पहुंचे। यहां की मूल समस्याओं को समझा जाए। फिर निस्तारण के लिए प्रयास किए जाए। इसका फायदा कुछ गांवों को मिल चुका है।

कुछ गांव जहां लोगों को मिला फायदा 

नवाबगंज बार्डर के साबरखेड़ा गांव में कई सालों से राशनकार्ड बनाने और स्कूल पर कब्जे के मामले गांव पहुंचकर एसडीएम ने सुलझाए।

भोजीपुरा के पीपरसाना में बड़ी आबादी के पास शौचालय नहीं थे। पांच दिन पहले अधिकारी गांव पहुंचे। एक जगह चिहि्न्त करके सामुदायिक शौचालय बनाया जा रहा है।

ट्यूलिया गांव की पराली जलाने की समस्या को सुलझाया जा रहा है।

परसाखेड़ा गौटिया की सड़क की समस्या सालों से लंबित चल रही थी। नगर निगम से जमीन की फाइल मंगवाकर समस्या सुलझाई जा रही है।

फरियादी कार्यालय आने के बाद लंबित रहे। लोग परेशानी से जूझते रहे। इस परंपरा को खत्म करना है। इसलिए मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली समस्याओं की मैपिंग के बाद एक-एक करके गांव में पहुंचा जा रहा है। - आशुतोष गुप्ता, सदर तहसीलदार 

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