जागरण संवाददाता, बरेली : शौहर के जुल्म से बेघर हुईं औरतें अब कानून का सहारा चाहती हैं। ऐसा सख्त कानून, जो उनका घर उजड़ने से बचाए। रविवार को करीब तीन दर्जन तलाक, हलाला और बहु-विवाह की शिकार महिलाएं आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी के बैनर तले आई। यह मांग उठाने कि तीन तलाक पर रोक का जो कानून बना है, उसमें हलाला और बहु-विवाह पर रोक का प्रावधान जोड़ा जाए।

सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान कहती हैं कि तीन तलाक पर अभी कानून पास नहीं हुआ। सरकार को चाहिए कि इसमें हलाला-बहु-विवाह को भी शामिल करे। इससे लाखों औरतों की जिंदगी नर्क बनने से बच जाएगी। केवल तलाक से औरतों को राहत नहीं मिलेगी। निदा के मुताबिक, मुस्लिम औरतों को सख्त कानून से ही इंसाफ मिल सकता है। वह फतवों पर भी सवाल उठाती हैं। कहती हैं कि मौलवी हमेशा मर्दो के पक्ष में ही फतवा देते हैं। महिलाओं के हक की अनदेखी की जाती है। इसलिए एक महिला को काजी की भूमिका निभानी चाहिए जो उनके मसाइल सही से बता सकें। इससे ही शरीयत की आड़ में महिलाओं के साथ ज्यादती रुक सकेगी।

दोस्त से हलाला के बाद ठुकराया संस्था के बैनर तले पहुंची निशा कहती हैं कि मेरे शौहर अनवर ने मुझे तलाक दिया। इसके बाद अपने दोस्त के साथ हलाला कराया लेकिन, दोबारा निकाह नहीं किया। उसने मुझे बेइज्जत करने के लिए ऐसा किया था। अब मैं अपने चार बेटों के साथ उससे दूर रहती हूं।

शाहजहां ने किया हलाला से इन्कार

करीब 45 वर्षीय शाहजहां अपने बेटी के साथ रहती हैं। उनके शौहर ने तलाक देकर घर से निकाल दिया था। बाद में दूसरी शादी कर ली। जब उस औरत से बच्चे नहीं हुए तो शाहजहां के साथ दोबारा रहने की बात उठाई। इसके लिए हलाला की प्रक्रिया बताई। शाहजहां ने हलाला करने से इन्कार करते हुए अकेले रहने का फैसला किया।

Edited By: Jagran