एलएसडी पीड़ित गाय व भैंसों को इस साल नहीं लग पाएगी बरेली व हिसार में बनी स्वदेशी लंपी प्रो वैक्सीन

lumpy skin disease

पीयूष दुबे, बरेली : देश के कई प्रांतों में गोवंशीय और महिष वंशीय पशुओं के लिए लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) परेशानी का सबब बन चुकी है। इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए स्वदेशी एवं सजातीय लंपी प्रो वैक्सीन बरेली के आइवीआरआइ (IVRI) और हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक मिलकर बना चुके हैं, लेकिन इसका लाभ फिलहाल इस वर्ष पशुओं को नहीं मिल सकेगा।

आइवीआरआइ संयुक्त निदेशक शोध डा. जी.साई कुमार का कहना है कि सामान्य तौर पर एक वैक्सीन के लांच होने के बाद उसके बाजार में आने तक करीब एक साल लग जाता है, लेकिन आपात स्थितियों में छह माह के अंदर भी उसे बाजार में उतारा जा सकता है। अभी तक लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन का किसी फार्मा कंपनी के साथ अनुबंध नहीं हुआ है। इसके बाद भी डीसीजीआइ (DCGI) से वैक्सीन बाजार में उतारने से पहले अनुमति लेनी होगी। डीसीजीआइ के स्तर से वैक्सीन की गुणवत्ता, उसके पशुओं पर प्रभाव आदि बिंदुओं की जांच करने के बाद अनुमति मिलेगी। उसके बाद बाजार में वैक्सीन को उतारा जा सकता है। बता दें कि बीते सप्ताह ही लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन लांच की गई थी।

पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में फैली है बीमारी :

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात समेत देश के विभिन्न प्रांतों में एलएसडी (LSD) फैल गई है। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में लगातार गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं की मौत लंपी स्किन डिजीज से हो रही है। वहीं उत्तराखंड और गुजरात में भी हाल काफी खराब हैं। केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने हरियाणा और पंजाब राज्यों के मंत्रियों व अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। पंजाब में करीब 75 हजार पशु एलएसडी की चपेट में आ चुके हैं। सरकार ने गोट पाक्स दवा की 25 लाख डोज की मांग भी की। वहीं हरियाणा में भी 87 पशुओं की मौत हो चुकी है। यहां भी 20 लाख के करीब डोज की मांग है।

अब तक लगाया जा रहा विषमजातीय गोट पाक्स टीका :

मच्छरों और खून चूसने वाले कीड़ों और मक्खियों के काटने से एक से दूसरे जानवर में फैलने इस बीमारी से सभी आयु वर्ग की गाय व भैंस प्रभावित हो रही हैं। लंपी स्किन डिजीज से गाय और भैंस से बचाने के लिए गोट पाक्स टीका लगाया जा रहा है। एलएसडी विषाणु कैप्रीपाक्स परिवार का सदस्य है। यह भेड़ एवं बकरी पाक्स से आनुवंशिक रूप से काफी मिलता जुलता है। इससे पहले एलएसडी का कोई सजातीय टीका उपलब्ध न होने के कारण केंद्र सरकार ने गायों को एलएसडी रोग से बचाव के लिए भेड़ एवं बकरी पाक्स के टीके (विषमजातीय) के उपयोग को अधिकृत किया है। परंतु यह टीका गायों में एलएसडी के खिलाफ केवल आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है।

Edited By: Jagran