बरेली, अंकित शुक्ला। ‘मैं अभी रुकी हुई हूं ताकि कल चलूं तो हिंदुस्तान की सांसें चलें। ठहरी हुई हूं ताकि देश का दिल धड़कता रहे। भारत में पहली बार अपना जन्मदिन चलते हुए नहीं, खड़े हुए मनाया। पहली बार ऐसा हुआ है कि मेरे पहियों में 40 दिन के लिए जंजीरें पड़ी हैं।’

167 साल के भारतीय रेल (16 अप्रैल 1853) के इतिहास में यह पहली बार हुआ। जब जब यात्री ट्रेन रेल दिवस पर पटरी पर नहीं दौड़ी। मुंबई के बोरीबंदर (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणो के लिए चली पहली पैसेंजर ट्रेन ने 34 किलोमीटर का सफर 51 मिनट में तय किया था। ट्रेन चलाने के लिए ब्रिटेन से तीन भाप के इंजन मंगवाए गए थे। जिनको सुल्तान, सिंधु और साहिब नाम दिया गया था। जिसके बाद से आज पहली बार रेल दिवस पर यात्री ट्रेन का संचालन नहीं हुआ।

1906 में इज्जतनगर मंडल में शुरू हुआ था संचालन: रेलवे जानकारों के मुताबिक 1882 में रुहेलखंड-कुमांयू रेलवे कंपनी का सेक्रेटरी समझौता होने के बाद 1884 तक बरेली-भोजीपुरा रेल खंड एवं 1906 तक भोजीपुरा-काठगोदाम तथा बरेली-कासगंज रेल खंड में लाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद नियमित रेल संचालन शुरू हुआ। प्रशासक आइजम के नाम पर रेलवे परिसर का नाम इज्जतनगर रखा गया है। स्टीम इंजनों के मरम्मत के लिए इज्जतनगर यांत्रिक कारखाना 1913 में स्थापित किया गया। 1923 में सवारी और मालडिब्बों की मरम्मत कार्य शुरू हुआ।

एक नजर

इज्जतनगर मंडल से 80 यात्री एक्सप्रेस, मेल ट्रेनों, 86 पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है।

मंडल में कुल 88 स्टेशन आते हैं।

उत्तर रेलवे के बरेली जंक्शन पर रोजाना 164 यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। जिनमें से 160 को यहां ठहराव दिया जाता है।

उत्तर रेलवे की जंक्शन से नौ अप-डाउन ट्रेनें बनकर चलती हैं।

प्रतिदिन जंक्शन से 15 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं।                                                                  17 अप्रैल से आरक्षण टिकट सेवा, टाइम टेबल 18 अप्रैल 1853 को शुरू किया था

167 साल के इतिहास में पहली बार रेल दिवस पर यात्री ट्रेनों का संचालन नहीं हुआ है। मेरी याददाश्त में पहली बार यात्री ट्रेनों को एक साथ पूरे भारत में आराम दिया गया है।

- राजेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी इज्जतनगर मंडल

155 ट्रैकमैनों को मिली पदोन्नति

रेल दिवस पर इज्जतनगर मंडल के इंजीनियरिंग विभाग के विभिन्न सेक्शनों में कार्यरत 155 ट्रैकमैनों को पदोन्नति मिली है। इसकी परीक्षा का परिणाम लगभग एक माह पूर्व जारी हो चुका था लेकिन लॉकडाउन के कारण पोस्टिंग आदेश जारी नहीं हुए थे। पूवरेत्तर रेलवे श्रमिक संघ के मंडल मंत्री शैलेंद्र वर्मा, सहायक महामंत्री जेएस भदौरिया ने बताया कि रेल प्रशासन से जल्द परीक्षा परिणाम घोषित करने की मांग की थी। वहीं नरमू के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने बताया कि यूनियन के प्रयासों से ट्रैकमैन ग्रेड-2 से ग्रेड-1 पर पदोन्नति मिली।

 

Posted By: Ravi Mishra

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