बरेली, जेएनएन। Dalit harassment case : किसी मामले में गवाह या अन्य किसी की जमानत लेना कैसे सिर दर्द बन जाता है, आइये इस केस से समझते हैं। बरेली में सात साल पुराने पाक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने गवाहों के जमानतदारों को कोर्ट में तलब कर लिया। जमानतदारों को कोर्ट में जमानत राशि जमा करना पड़ी। भुता थाना क्षेत्र निवासी सुनील के खिलाफ दलित उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट का मुकदमा चल रहा है। जिसमें गवाह गवाही देने में टालमटोल कर रहे थे।

बीते दिनों अदालत ने गवाह गीता व चंद्रपाल के खिलाफ जमानती वारंट भेजकर पुलिस को दोनों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। पुलिस के पहुंचने पर गांव के ही वेदपाल व हरस्वरूप ने गवाहों की जमानत ले ली। उन्होंने कहा कि नियत तारीख पर गवाह कोर्ट नहीं पहुंचते हैं तो वे जिम्मेदारी निभाएंगे। गवाह इसके बावजूद कोर्ट नहीं पहुंचे तो भुता पुलिस ने दोनों जमानतदारों को कोर्ट में लाकर पेश कर दिया। अदालत ने दोनों से ढाई ढाई हजार रुपए जमानत राशि जमा करा ली। जमानत राशि जमा होते ही गवाह भी अदालत पहुंच गए। बुधवार को टालमटोल कर रहे गवाह ने भी कोर्ट में अपनी गवाही दे दी।

महिला से मारपीट में पड़ोसियों  के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज : महिला से मारपीट में इज्जजतनगर पुलिस ने चार आरोपितों पर रिपोर्ट दर्ज की है। कंजादासपुर के आलोक नगर निवासी शहामत खां ने बताया कि 21 नवंबर को वह निजी कार्य के चलते घर से बाहर गए हुए थे। उसी दिन सुबह करीब साढ़े नौ बजे उनकी पत्नी जन्नती दोनों बेटियों के साथ कहीं जा रही थीं। आरोप है कि पड़ोस के रहने वाले अरशद खां, कीसवर, नुसरा और फिजा ने पत्नी व बेटियों से मारपीट की। मारपीट में बेटी घायल हो गई। मामले की जानकारी होते ही शहामत खां आए और पीड़ित प्त्नी व बेटियों को लेकर इज्जतनगर थाने पहुंचे। इज्जतनगर इंस्पेक्टर संजय कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

Edited By: Samanvay Pandey