बरेली में फिर लटकी केसर चीनी मिल की नीलामी: दीपावली पर भी नहीं मिलेगा 170 करोड़ का बकाया गन्ना मूल्य
बरेली की केसर चीनी मिल की नीलामी एक बार फिर टल गई है, जिससे गन्ना किसानों को दीपावली पर भी ...और पढ़ें

केसर चीनी मिल
HighLights
सप्ताहभर बाद नीलामी की हुई थी बात, पांच दिन बीते तारीख तक तय नहीं
जागरण संवाददाता, बरेली। गन्ना किसानों को दीपावली पर भी बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान मिल पाने के आसार नहीं दिख रहे हैं। 170 करोड़ रुपये की बकायेदार केसर चीनी मिल, बहेड़ी की कुर्क की गई 11.447 हेक्टेयर जमीन की नीलामी के लिए 24 अक्टूबर को तारीख तय हुई थी, लेकिन बोलीदाताओं के चेक लेकर पहुंचने के कारण टल गई थी।
उप जिलाधिकारी ने सप्ताहभर बाद नीलामी होने की बात कही थी, लेकिन पांच दिन गुजर जाने के बाद अभी नीलामी की तिथि ही घोषित नहीं की जा सकी है। हालात बता रहे हैं कि किसानों को त्योहार पर भी बकाया भुगतान नहीं मिल सकेगा।
चीनी मिल पर किसानों का 170 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। बकाया भुगतान कराने के लिए महीनों से दबाव बनाया जा रहा है। चीनी मिल प्रबंधन और अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने से भी बात नहीं बनी तो आरसी जारी कराकर कुर्की शुरू कर दी गई।
प्रशासन ने विगत 31 मई को चीनी मिल की 11.447 हेक्टेयर जमीन 28.05 करोड़ रुपये में नीलाम भी कराई थी, लेकिन कम कीमत में नीलामी का मुद्दा उठने के बाद नीलामी निरस्त कर दी गई थी।
नए सर्किल रेट के आधार पर दोबारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, पिछले 25 सितंबर को नीलामी की तारीख भी तय हुई थी, लेकिन इसी बीच मिल का सौदा 431 करोड़ में हो गया।
चीनी मिल खरीदने वाले फिरोजाबाद के अवध ग्रुप के चेयरमैन ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने के लिए 55 करोड़ रुपये और चीनी मिल कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए 11 करोड़ रुपये का चेक भी दिया था।
आश्वस्त किया था कि चीनी मिल में पेराई सत्र शुरू होने से पहले बकाया पूरा भुगतान कर देंगे। उन्हीं के आग्रह पर नीलामी टाल दी गई थी। बाद में दोनों चेक बाउंस हो गए थे।
कुर्क भूमि की 24 अक्टूबर को नीलामी होनी थी, जिसमें एक बोलीदाता ही डीडी लेकर पहुंचा, तीन लोग चेक लेकर पहुंचे थे, जबकि डीडी अनिवार्य किया गया था। तकनीकी कारणों से नीलामी सप्ताहभर टालने की बात कही गई थी।
मगर, पांच दिन गुजर जाने के बाद दूसरी तारीख तक तय नहीं हो सकी है। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी का कहना है कि नीलामी प्रशासन स्तर से कराई जा रही है, किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
