जेएनएन, बरेली : देवरिया जेल कांड के बाद माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद को बरेली जिला जेल भी शिकंजे में रख पाएगी, कहना मुश्किल है। वो इसलिए क्योंकि दो साल पहले बनकर तैयार हुई कथित रूप से हाईटेक जेल में आज तक जैमर नहीं लग पाया है। यानी जेल के अंदर मोबाइल इस्तेमाल के लिए मशहूर अतीक के लिए पहली आजादी तो यहीं से मिल चुकी है। अतीक पर आरोप था कि देवरिया जेल से अपराध को बढ़ावा दे रहा। इस दौरान लखनऊ के बिल्डर को कार समेत अगवा कर देवरिया जेल के अंदर बुलाकर पीटने के आरोप ने पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए। हालांकि, कार्रवाई के नाम पर अतीक को बरेली जिला जेल शिफ्ट कर दिया गया। देवरिया जेल की तरह ही यहां भी जैमर नहीं है।

महज 12 जेलों में जैमर

प्रदेश में एक आदर्श कारागार और पांच केंद्रीय कारागार समेत कुल 70 जेल हैं। मोबाइल का इस्तेमाल रोकने के लिए 12 जेलों में जैमर की व्यवस्था की गई है। इसमें मुजफ्फरनगर, वाराणसी, मिर्जापुर, सुल्तानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, नैनी- इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और गोरखपुर, बरेली केंद्रीय कारागार शामिल है।

जैमर नहीं, मतलब खतरा

ज्यादातर जेलों में जैमर नहीं होने का मतलब जेल की सुरक्षा व्यवस्था से सीधे खिलवाड़ है। वो इसलिए क्योंकि कई बार मोबाइल जेल के अंदर पहुंच जाता है। जैमर न होने से धड़ल्ले से बातचीत होती है।

जेल में पर्ची लगाकर मिलने वाले दो कौन थे?

जेल में पहले दिन अतीक के वकील उनसे मिले थे। उसी दिन एक अन्य युवक ने पर्ची लगाकर मिलाई की थी। बुधवार को भी अतीक से किसी शख्स ने पर्ची लगाकर मुलाकात की है। हालांकि, जेल प्रशासन ने इनकी डिटेल तक जानने का प्रयास नहीं किया।

टेंशन में बरेली के कारोबारी

अतीक पर थोड़ी भी ढिलाई भारी पड़ सकती है। वह जेल में ही रहकर अपराध को हवा देने में माहिर है। यही कारण है कि उसके बरेली पहुंचने के साथ ही बड़े व्यापारी व कारोबारी परेशान हैं।

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